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कोरोना इफेक्ट : पैसा है, इरादा है लेकिन देने वाले वाले नदारद

Sun, 05 Apr 2020 12:35 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 05 Apr 2020 12:35 AM IST
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Corona Effect: Money is there, but intention is missing
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉक डाउन ने तमाम ऐसे वकीलों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न कर दिया, जो दूर-दराज के जिलों से आकर प्रयागराज में वकालत कर रहे हैं। उन युवा अधिवक्ताओं की समस्या ज्यादा बड़ी है, जिनके पैर अभी वकालत के पेशे में पूरी तरह से जमे नहीं है। कहने को तो हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पास करोड़ों रुपये का बजट है, मगर हालात कुछ ऐसे हैं कि इसे खर्च करने वाला कोई नहीं। यह समस्या ऐसे समय सामने आ खड़ी हुई है, जब बार एसोसिएशन की कोई निर्वाचित कार्यकारिणी प्रभाव में नहीं है। 



पुरानी कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लिहाजा उसे फंड खर्च करने का अधिकार नहीं है। नए चुनाव की मतगणना पूरी न होने होने से नई कार्यकारिणी अधर में है। जब तक मतगणना पूरी होकर परिणाम घोषित नहीं होता, नई कार्यकारिणी भी कुछ कुछ करने की स्थिति में नहीं होगी। बार का चार्ज एल्डर कमेटी के पास है, जिसके अधिकार सीमित हैं, ऐसे में पूर्व और निर्वाचित पदाधिकारी चाहते हुए भी वकीलों के लिए कुछ नहीं कर पा रहे। वकीलों की ओर से इस बात की लगातार मांग की जा रही है कि युवाओं की मदद की जानी चाहिए। 

Corona Effect: Money is there, but intention is missing
रूपया(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

निजी तौर से की जा रही सहायता  

तमाम अधिवक्ता विषम परिस्थिति में अपने साथियों की मदद को आगे आए हैं। अपने परिचित और जूनियर वकीलों की मदद कर रहे हैं। बार एसोसिएशन के महासचिव जे बी सिंह कहते है कि बार के फंड से उनकी मदद नहीं कर सकता, इसकी लाचारी है। लेकिन व्यक्तिगत तौर से जो कुछ भी हो पा रहा है, सहायता की जा रही है। वकीलों के लिए राहत कोष बनाने वाले अधिवक्ता अनूप बरनवाल बताते हैं कि सामूहिक रूप से कोष में लोगों की दिलचस्पी कम है। राहत कोष में मदद के लिए कम ही लोग आगे आए हैं। 

सरकार को भी दी जा रही सहायता 

तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि तमाम अधिवक्ता न सिर्फ अपने साथियों की मदद कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने सरकार को भी लाखों की सहायता दी है। पूर्व महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 50 लाख रुपये दिए। बार काउंसिल के उपाध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा भी मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 हजार की मदद दे चुके है। काउंसिल के अध्यक्ष और कुछ सदस्य भी पचास 50-50 हजार रुपये की मदद दे चुके हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय का कहना है कि नई कार्यकारणी के सदस्यों के साथ हम लोग संपर्क में हैं, जो भी वकील मदद के लिए फ़ोन करते है, उनकी पूरी सहायता की जा रही है। हालांकि आर्थिक मदद की मांग बहुत कम ही आई है।
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