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Prayagraj
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 02 Jan 2020 01:41 AM IST
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इविवि कुलपति रतन लाल हंगलू
- फोटो : Prayagraj
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पदभार ग्रहण करने के साथ ओएसडी की नियुक्ति पर उठने लगे थे सवाल
29 दिसंबर को नियुक्ति के चार वर्ष पूरा करने के बाद दिया इस्तीफा
प्रयागराज। नए वर्ष के पहले दिन अपने पद से इस्तीफा देने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में बीते 29 दिसंबर को चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले प्रो. रतन लाल हांगलू अपने पूरे कार्यकाल के दौरान विवादों में रहे। कुलपति के रूप में पदभार संभालने के बाद प्रो. हांगलू अपने ओएसडी की नियुक्ति को लेकर सवालों में आए।
ओएसडी पद पर नियुक्ति पाने के बाद अमित सिंह सीएमपी डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति पा गए। अमित सिंह पर अपने प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी करके नियुक्ति हासिल करने का आरोप लगने के बाद भी कुलपति ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। ओएसडी और उसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अमित सिंह की नियुक्ति को लेकर विवि के छात्रों की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए।
कोर्ट के आदेश के बाद भी मनमानी करते रहे
कुलपति के पदभार ग्रहण करने के समय कार्यवाहक कुलपति रहे प्रो. ए सत्यनारायण को डीन के पद से हटाने का मामला हो अथवा विवादों में रहे कुछ शिक्षकों को महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति का, प्रो. हांगलू ने हर आरोप की अनदेखी की। सुप्रीम कोर्ट से आदेश होने के बाद भी कुलपति ने प्रो. सत्यनाराण को डीन का पदभार नहीं सौंपा। इसके अलावा विवि में अवकाश प्राप्त शिक्षकों की दोबारा नियुक्ति तथा बिना विज्ञापन के विवि में कुछ पदों पर नियुक्ति मामले में कुलपति ने हमेशा मनमानी की।
रजिस्ट्रार सहित महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में अपनी मर्जी
विवि में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और पीआरओ की नियुक्ति को लेकर कुलपति का पूरा कार्यकाल विवाद में रहा। विवि के एक प्रोफेसर को रजिस्ट्रार पद पर नियुक्त करने के लिए कुलपति ने बड़े दांव चले। इसके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों को स्वायत्तता देने और वहां पीजी कक्षाएं चलाने की मंजूरी देने अथवा शिक्षक भर्ती के मामले को लेकर भी विवाद रहा।
महिला आयोग ने पीआरओ नियुक्ति पर उठाया था सवाल
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इविवि में कुलपति की ओर से पीआरओ की नियुक्ति को सवालों के घेरे में लिया था। महिला आयोग की सदस्य ने सवाल उठाया था कि एक ऐसे शिक्षक को पीआरओ कैसे नियुक्त कर दिया गया, जो अभी तक प्रोबेशन भी पूरा नहीं कर सका है। महिला आयोग ने कुलपति को एक महिला के साथ बातचीत का ऑडियो लीक होने और महिला छात्रावास की सुरक्षा मामले में तलब किया। महिला आयोग की ओर से तलब किए जाने के मामले को लेकर सबसे अधिक पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा महत्वपूर्ण भूमिका में रहीं। उन्होंने एक दिन पहले प्रदेश के राज्यपाल एवं डीजीपी से मिलकर कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
प्रो. हांगलू के कार्यकाल में पांच सौ से अधिक छात्रों पर कार्रवाई
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में प्रो. हांगलू की नियुक्ति के बाद लगभग पांच सौ छात्रों का निष्कासन और निलंबन हुआ। इनमें सबसे चर्चित कार्रवाई कुलपति के खिलाफ आवाज उठाने वाले इविवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सचिव रोहित मिश्र के निलंबन एवं निष्कासन की रही। रोहित मिश्र ने लगातार कुलपति के खिलाफ आंदोलन जारी रखा। रोहित के ही साथ छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष एवं शोध छात्रा ऋचा सिंह ने कुलपति के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले रखा। महिला आयोग के पास शिकायत से लेकर राज्यपाल, राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूजीसी सब जगह ऋचा ने कुलपति की शिकायत की। विवि से निष्कासन एवं निलंबन के बाद कई छात्रों का करिअर खत्म हो गया।
इविवि के इतिहास में दूसरे कुलपति ने बीच में छोड़ी कुर्सी
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास में कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू दूसरे ऐसे कुलपति हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बीच में ही कुर्सी छोड़ दी। इससे पूर्व प्रोफेसर एके सिंह ने विवादों में रहने के कारण कुलपति रहते हुए त्यागपत्र दिया था।
हालांकि कुलपति प्रो. रतनलाल हंागलू के कार्यभार संभालते ही वह चौतरफा विवाद में घिर गए थे। कभी महिलाओं से कथित ऑडियो में अभद्र टिप्पणी करते हुए उनके विरोधियों ने उन पर निशाना साधा तो कभी महिला उत्पीड़न के किसी अन्य मामले में वह निशाने पर रहे। पहली बार उन्हें महिला छात्रावास परिसर में छात्राओं की सुरक्षा के मसले पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने तलब किया। महिला आयोग कुलपति के जवाब से संतुष्ट नहीं था और आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने अमर उजाला से हुई खास बातचीत में यह स्पष्ट कर दिया था की कुलपति के खिलाफ कार्रवाई के लिए वह प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखेंगी।
कुलपति की नेतृत्व क्षमता पर उठते रहे सवाल
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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति प्रो. रतन लाल हंगलू का घेराव करते छात्र।--फाइल फोटो।
- फोटो : Prayagraj
इविवि के परफॉर्मेंस ऑडिट पर आई टीम ने लिया था आड़े हाथों
तत्कालीन वित्त अधिकारी की नियुक्ति पर भी उठाए थे गंभीर सवाल
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. आरएल हांगलू में नेतृत्व क्षमता का अभाव है। वह एक छोटी से मंडली के साथ विश्वविद्यालय चला रहे हैं। यह गंभीर टिप्पणी की थी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसीसी) की पांच सदस्यीय कमेटी ने, जिसे वर्ष 2017 के नवंबर माह में परफॉर्मेंस ऑडिट के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भेजा गया था। यह कमेटी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, बंगलुरू के प्रो. गौतम देसी राजू की अध्यक्षता में यहां जांच करने आई थी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कुलपति में नेतृत्व क्षमता का अभाव है। उन्होंने खुद को एक खराब प्रबंधक साबित किया। वह अधिकारों के बंटवारे और प्रशासन के विकेंद्रीकरण में भी नाकाम रहे। वह रोजमर्रा होने वाली समस्याओं में ही उलझे रह गए। कमेटी ने जो देखा, उसके अनुसार विश्वविद्यालय को कुलपति और उनकी एक छोटी सी मंडली चला रही है। कुलपति ने सारी शक्ति अपने पास रखी हैं या इस मंडली को सौंप दी हैं। छात्रों और आम अध्यापकों के साथ उनका कोई संपर्क नहीं रह गया है। कमेटी के सदस्यों ने यह भी कहा है कि बाकी विश्वविद्यालयों में भी प्रबंधन को कम महत्व दिया जाता है लेकिन, इविवि में तो प्रबंधन नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है।
यहां कोई काम दूरदृष्टि से नहीं हो रहा है। रोज उत्पन्न होने वाली समस्याओं में ही इनकी ऊर्जा समाप्त हो जा रही है। एक समस्या खत्म होती है तो दूसरी समस्या के आने का इंतजार किया जाता है। कमेटी ने वित्त अधिकारी के पद पर तत्कालीन प्रो. एनके शुक्ला को नियुक्त किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक प्रोफेसर को सौंप देना किसी भी दशा में उचित नहीं है। हालांकि, कमेटी की इस आपत्ति के बाद प्रो. एनके शुक्ला को इविवि का रजिस्टर बना दिया गया।
नए साल के पहले दिन मुंह पर काली पट्टी बांधकर जारी रखा आंदोलन
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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति प्रो. रतन लाल हंगलू का घेराव करते छात्र।--फाइल फोटो।
- फोटो : Prayagraj
कुलपति को हटाने के लिए पुलिस के विरोध के बाद भी महिला छात्रावास पर संयुक्त संघर्ष समिति का आंदोलन जारी रहा। संयुक्त संघर्ष समिति ने ईसीसी के सांस्कृतिक मंत्री जितेश शुक्ल के असामयिक निधन पर दुख व्यक्त किया। अंादोलन का नेतृत्व कर रहीं पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह, पूर्व अध्यक्ष दिनेश यादव ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। नए साल के पहले दिन छात्राओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर आंदोलन जारी रखा। इस मौके पर अखिलेश यादव, उपमंत्री सत्यम सनी, अजय सम्राट, ज्योत्सना, तनु, जितेंद्र धनराज, सत्यम कुशवाहा, मसूद अंसारी, संदीप साहू अजय बागी आदि मौजूद रहे।
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कुलपति के खिलाफ छात्र राज्यपाल से मिले
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इविवि में आंदोलन के दौरान कुलपति का घेराव करने जातीं छात्राएं।--फाइल फोटो।
- फोटो : Prayagraj
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बुधवार को संयुक्त संघर्ष समिति की अगुवाई में छात्रनेता रजनीश सिंह रिशु ने प्रदेश के राज्यपाल से मुलाकात की। छात्रों ने उन्हें कुलपति की अनियमितताओं की जानकारी दी। इस दौरान पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री रजनीश त्रिपाठी, आनंद सिंह शामिल रहे।
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कुलपति के हटते ही प्रॉक्टर, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी, पीआरओ ने भी पद छोड़ा
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प्रो. राम सेवक दूबे। (प्राक्टर इविवि)
- फोटो : Prayagraj
प्रो. हांगलू के पूरे कार्यकाल में सबसे करीबी रहे प्रो. एनके शुक्ला ने कई पद संभाले
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के इस्तीफा देने के बाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे, रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला, वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कांत मिश्र, पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। कुलपति के पद छोड़ देने के बाद अपने पद से त्यागपत्र देते हुए चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने कहा कि प्रॉक्टर का पद कुलपति प्रसाद पर्यंत होता है, ऐसे में उनके पद छोड़ देने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ के अध्यक्ष और प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने पद छोड़ने के बाद कहा कि अब वह प्रॉक्टर के दायित्व से मुक्त होने के बाद 2020 में मुक्त होकर शिक्षण कार्य करेंगे। प्रो. दुबे के कार्यकाल में पांच सौ से अधिक छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
पहले प्रॉक्टर और बाद में वित्त अधिकारी और रजिस्ट्रार का पद संभालने वाले प्रो. एनके शुक्ला ने भी कुलपति के हटने के बाद पद छोड़ दिया। वह प्रो. हांगलू के पूरे कार्यकाल के दौरान उनके करीबी बने रहे। इविवि महाविद्यालय अध्यापक संघ के अध्यक्ष रहे और सीएमपी डिग्री कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनील कांत मिश्र भी कुलपति के करीबी रहे। कॉलेजों में पीजी कक्षाएं और शिक्षकों के पद भरने के मामले में उन्होंने अपना सही तरीके से पक्ष रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विवि के पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार की भूमिका को लेकर महिला आयोग ने भी सवालिया निशान उठाया था। चित्तरंजन ने स्वीकार किया कि कुलपति के हटने के बाद वह बृहस्पतिवार को अपना पद छोड़ देंगे।
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