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तस्वीरें: ‘जमीन’ से जुड़ने को जमीन पर बैठी कांग्रेस, बिटिया के परिजनों के साथ पालथी मारकर बैठे राहुल-प्रियंका
Sun, 04 Oct 2020 09:58 AM IST
शाहरुख खान
आशीष निगम, अमर उजाला, हाथरस/अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, हाथरस/अलीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 04 Oct 2020 09:58 AM IST
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जमीन पर बैठे राहुल-प्रियंका
- फोटो : अमर उजाला
पूरे देश में छाए चंदपा प्रकरण ने कांग्रेस को भी जमीन पर बैठा दिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बिटिया के परिजनों से मिलने के लिए घर के बंद कमरे में पहुंचे और कुछ देर बाद ही जमीन पर बैठ गए। एक परिजन उनके लिए कंबल लेकर आया लेकिन दोनों ने घर वालों के साथ आत्मीयता जताते हुए जमीन पर बैठ कर बातचीत करना उचित समझा। लगभग दस मिनट तक वह पालथी मार कर बैठे रहे।
जमीन पर बैठे राहुल-प्रियंका
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान परिजनों को पहचानने के लिए टार्च का इस्तेमाल किया गया क्योंकि कमरे में अंधेरा होने से चेहरे आसानी से नहीं दिख रहे थे। कमरे में गर्मी और उमस भी बहुत थी जिससे नेता पसीने में सराबोर हो गए, लेकिन वह पूरा मामला समझ कर ही वहां से उठे। परिजन उनकी मुलाकात से पूरी तरह संतुष्ट दिखे। परिजनों ने इसका जिक्र भी किया।
प्रियंका गांधी
- फोटो : अमर उजाला
गौर हो कि कांग्रेस संगठन में शीर्ष स्तर पर उठापटक होने के बाद ये पहला मौका था, जब राहुल गांधी के तेवर बहुत तल्ख थे। उन्होंने सीधे यूपी की योगी सरकार को आड़े हाथ लिया। चुनौती तक दे डाली कि दुनिया की कोई ताकत उनको कहीं जाने से रोक नहीं सकती है। राहुल यहां मंजे हुए नेता की तरह नजर आए। उन्होंने अपने आत्मविश्वास से कांग्रेस के अंदर एक उम्मीद जगाई। संगठन को मजबूती से जनता के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। प्रियंका के साथ होने से संदेश और स्पष्ट था।
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बिटिया से परिवार से मिलते राहुल और प्रियंका
- फोटो : अमर उजाला
चंदपा में अनुसूचित जाति की बिटिया से सामूहिक दुष्कर्म और रात ढाई बजे शव जबरन जलाए जाने का मुद्दा देश भर में छाया है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व भी भविष्य की राजनीति को देखते हुए इस मामले में इंसाफ की लड़ाई में खुलकर आगे आया है। पूर्व में अनुसूचित जाति, जनजाति की राजनीति में कांग्रेस अगुवा थी, लेकिन बाद में यूपी में ये दौर बदला और कांग्रेस इनसे दूर होती गई।
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मृतिका के परिजनों से बात करते राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
अब राहुल प्रियंका की जोड़ी दूरियों को पाटने में लग गए हैं क्योंकि प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति का बड़ा वोट बैंक है, जो किसी भी दल के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है। इसलिए कांग्रेस ने इस मामले में कड़े तेवर दिखा कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।