जिन कंधों पर शुक्रवार को पिता की अर्थी का बोझ था, आज शनिवार को उन्हीं पर करोड़ों भारतीयों की उम्मीदें और तिरंगे की आन होगी। अलीगढ़ के लाल रिंकू सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके लिए राष्ट्र प्रथम है। वे शनिवार दोपहर 12 बजे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा को पीछे छोड़ टीम इंडिया से जुड़ने के लिए रवाना हो जाएंगे।
टी-20 वर्ल्ड कप के इस रोमांचक मोड़ पर रिंकू की मौजूदगी टीम इंडिया के लिए संजीवनी से कम नहीं है। भारत और पाकिस्तान के हाई-वोल्टेज मुकाबले में रिंकू ने जब विजयी चौका लगाया था, तब बीमारी के चलते बिस्तर पर लेटे पिता खानचंद की आंखें खुशी से चमक उठीं थीं।
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रिंकू सिंह की पिता की अंतिम यात्रा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा था, मेरी तबीयत खराब है, पर बेटे के इस चौके ने मुझे ठीक कर दिया। पिता की वह आखिरी खुशी अब रिंकू के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले करो या मरो के मुकाबले में सबसे बड़ी प्रेरणा बनेगी।
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रिंकू सिंह की पिता की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सचिन और विराट जैसी कर्तव्यनिष्ठा
रिंकू सिंह का यह फैसला देश के महान क्रिकेटरों की याद दिलाता है। क्रिकेट जगत ने पहले भी देखा है कि कैसे सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली ने पिता के निधन के तुरंत बाद मैदान पर उतरकर देश के प्रति अपना फर्ज निभाया था। अब उसी गौरवशाली और अनुशासित परंपरा में रिंकू सिंह का नाम भी सुनहरे अक्षरों में जुड़ गया है।
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मोक्षधाम में रिंकू सिंह
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बेसुध होकर गिरी मां
पिता के जाने की खबर जब ओजोन सिटी स्थित आवास पर पहुंची, तो वहां का मंजर कलेजा चीर देने वाला था। ग्रेटर नोएडा के अस्पताल से घर लाते समय तक मां बीना को यह बताया गया था कि डॉक्टर ने उन्हें घर ले जाने को कहा है, लेकिन जैसे ही घर की चौखट पर सच सामने आया, मां बेसुध होकर गिर पड़ीं।
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रिंकू सिंह की पिता की अंतिम यात्रा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बहन नेहा और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे परिवार को ढांढस बंधाने के बाद रिंकू ने भारी मन से लेकिन मजबूत इरादे के साथ देश के लिए खेलने का संकल्प लिया है।