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Women's Day: हिम्मत और हौसले से छू लिया आसमां, पढ़िए इनकी सफलता की कहानी

Fri, 08 Mar 2019 12:03 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 08 Mar 2019 12:03 PM IST
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Women's Day 2019 successfull women of mathura
मथुरा की सफल महिलाएं
एक अलग पहचान बनानी थी। इतिहास रचना था। मथुरा की इन महिलाओं ने यह कर दिखाया। राह में तमाम चुनौतियां आईं, लेकिन हर बाधा को हिम्मत और हौसले के साथ पार करके कामयाबी का परचम फहरा दिया। कोई समाज के लोगों को न्याय दिलाने के लिए न्यायिक अफसर बन गईं तो कोई शिक्षक बनकर ज्ञान का दीप जला रही हैं। महिला दिवस पर पढ़िए इन महिलाओं की सफलता की कहानी...!
Women's Day 2019 successfull women of mathura
अवनिका गौतम
महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए जज बनीं अवनिका गौतम
वृंदावन किशोरपुरा निवासी समाज सेविका डॉ. लक्ष्मी गौतम की बेटी अवनिका गौतम महिलाओं और बच्चों को न्याय और उनके अधिकार दिलाने के लिए न्यायिक अफसर बन गईं। वह रांची में सिविल जज हैं। उन्होंने 2014 में झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में नौंवी रैंक हासिल की थी। आगरा कॉलेज आगरा से एमएससी, एमफिल और कानून की पढ़ाई की। महिलाओं और बच्चों को उनके हक और न्याय दिलाने के लिए वो लगातार प्रयास करती रहती हैं। महिलाओं को हर फील्ड में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
Women's Day 2019 successfull women of mathura
गोशाला संचालिका सुदेवीदासी
गोवंश की 'मदर टेरेसा'
जर्मन की रहने वाली फेडरिक इरिन ब्रूनिंग जिन्हें मथुरा में सुदेवीदासी के नाम से जाना जाता है, वो ब्रज दर्शन के लिए 1976 में मथुरा आईं थीं। उन्होंने यहां गोवंश को भूखे भटकते देखा। घायल देखा तो राधाकुंड में एक गोशाला खोल दी। अब उनकी गोशाला में 2000 गोवंश हैं। राधाकुंड में सुरभि गोसेवा निकेतन खोला है। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से विभूषित किया है। सुदेवीदासी घायल गोवंश को अपनी गोशाला में ले जाकर इलाज कराती हैं। वह ब्रज दर्शन के लिए आईं थीं और यहीं की होकर रह गईं।
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Women's Day 2019 successfull women of mathura
डॉ. मुक्ति माहेश्वरी
डॉक्टर बनकर पूरा किया सपना 
विरला मंदिर के पास रहने वालीं डा. मुक्ति माहेश्वरी पढ़ाई के समय से ही महिलाओं को सेहतमंद बनाने का सपना देखती थीं। उसी समय उन्होंने ठान लिया था कि डॉक्टर बनना है। परिवार वालों ने भी उनका साथ दिया। अब डॉ. मुक्ति माहेश्वरी महिला रोग विशेषज्ञ हैं। मुक्ति समय समय पर कैंप लगाकर अपने चिकित्सक पति डॉ. शशांक माहेश्वरी के साथ मिलकर महिलाओं को उनकी सेहत के प्रति जागरूक भी करती रहती हैं। 
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Women's Day 2019 successfull women of mathura
राजरानी चतुर्वेदी
शिक्षा की अलख जगाने को तोड़ीं पाबंदियां
राजरानी चतुर्वेदी गणेश टीला मथुरा की रहने वाली हैं। शिक्षा की अलख जगाने के लिए उन्होंने समाज और परिवार द्वारा खींची गईं पाबंदियों की रेखा को लांघ दिया था। 20 साल की उम्र में पति चल बसे। डेढ़ साल के बेटे के सहारे जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ाया। पहले खुद शिक्षित हुईं। टीचर बन गईं। बेटे को पढ़ाया। बहू आई तो उसे भी शिक्षित किया। आज भी राजरानी महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करती रहती हैं। उनका कहना है कि एक पढ़ी लिखी महिला ही खुद को आज के समाज में साबित कर सकती है। अपने अधिकारों को समझ सकती है।
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