अनाथ आश्रम से निकलकर कड़े संघर्ष के बाद न सिर्फ खुद को बल्कि अपने जैसे एक हजार से अधिक युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने वाले एकता निराधार संघ के सागर रेड्डी को सोमवार को यशवंत राव केलकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आगरा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें यह सम्मान दिया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को संघर्ष का मंत्र दिया।
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सागर रेड्डी को सम्मानित करते सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65 वें अधिवेशन के दौरान सागर रेड्डी ने युवाओं से कहा कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती लेकिन एक दिन जरूर मिलती है। बताया कि एक साल की छोटी सी उम्र में उनके माता-पिता की हत्या कर दी गई। इसके बाद वो एक अनाथ आश्रम में पले-बढ़े। सागर रेड्डी की कहानी सुनकर सीएम योगी आदित्यनाथ भी भावुक हो गए।
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विद्यार्थियों को संबोधित करते सागर रेड्डी
- फोटो : अमर उजाला
नियम के तहत 18 साल की उम्र में अनाथ आश्रम से जाना पड़ा। तब उनके पास कुछ नहीं था। दो साल मंदिरों और गुरुद्वारों में प्रसाद ग्रहण कर गुजर-बसर की। इसके बाद मुंबई चले गए। यहां उन्होंने किसी की मदद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। अपनी मेहनत और लगन से एक प्रतिष्ठित कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई।
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सागर रेड्डी, साथ में एबीवीपी कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
सागर रेड्डी ने बताया कि एक दिन अनाथ आश्रम में भ्रमण करने गए। यहां से लौटने के बाद उन्होंने प्रण किया कि वो अपनी तरह अनाथ आश्रम से निकलने वालों युवाओं को राह दिखाएंगे। ताकि वह दर-दर न भटकें, गलत रास्ते पर न चले जाएं। उन्होंने बताया कि एक हजार से अधिक युवाओं को योग्य बनाने में वह मदद कर रहे हैं।
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सागर रेड्डी
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि वो अब तक 700 से अधिक युवाओं को नौकरी लेने के योग्य बना चुके हैं। 700 से अधिक युवतियों का विवाह करा चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार भी अब अनाथ आश्रम से निकलने वाले बच्चों को एक फीसदी आरक्षण दे रही है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वह भी दृढ़ संकल्प के साथ किसी कार्य को चुने फिर से उसे अंजाम तक पहुंचाएं।