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पुलवामा शहीद के लिए की गईं घोषणाएं डेढ़ साल बाद भी अधूरी, वीरनारी ने मुख्यमंत्री को दी जानकारी
Mon, 07 Sep 2020 09:07 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 07 Sep 2020 09:07 AM IST
सार
शहीद के नाम पर गांव में सरकारी स्कूल नाम रखा जाएगा। गांव की मुख्य सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखा जाएगा। शहीद के एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाएगी। शहीद के परिजनों को खेती के लिए पट्टे पर जमीन दी जाएगी।
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शहीद कौशल किशोर
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पुलवामा में डेढ़ साल पहले 14 फरवरी 2019 को शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान कहरई निवासी कौशल कुमार रावत की शहादत के बाद किए गए वादे अब तक अधूरे हैं। शहीद की पत्नी ममता रावत ने मुख्यमंत्री से मिलकर इसकी जानकारी दी। इस पर शासन ने डीएम से तीन दिन में शहीद के सम्मान में किए कार्यों की रिपोर्ट तलब की है।
शहीद की पत्नी ममता रावत
- फोटो : अमर उजाला
ममता दो सितंबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलीं। उन्होंने बताया कि शहादत के बाद मंत्री, सांसद, विधायक व जिला प्रशासन ने शहीद के सम्मान में बड़े-बड़े वादे किए। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मृति स्मारक की घोषणा की, लेकिन 18 माह बाद गांव में 60 गज जमीन पर स्मारक प्रस्तावित है। यह जमीन भी कम है और भी घोषणाएं थीं। कहरई गांव में मुख्य प्रवेश द्वार शहीद के नाम पर बनेगा।
स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के नाम पर गांव में सरकारी स्कूल नाम रखा जाएगा। गांव की मुख्य सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखा जाएगा। शहीद के एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाएगी। शहीद के परिजनों को खेती के लिए पट्टे पर जमीन दी जाएगी। गांव के मुख्य मार्ग पर शहीद के नाम पर तोरण द्वार 18 माह बाद नहीं बन सका। इसके लिए शासन में प्रस्ताव लंबित है। खेती के लिए सरकारी जमीन नहीं मिली। गांव में सरकारी स्कूल का नाम शहीद के नाम पर नहीं रखा जा सका।
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ममता रावत, शहीद की पत्नी,विकास रावत, शहीद का पुत्र
- फोटो : अमर उजाला
नहीं होती कोई सुनवाई...
उस समय जो वादे किए वे प्रशासन ने पूरे नहीं किए। मैं कई बार डीएम से मिल चुकी हूं। प्रशासन कोई सुनवाई नहीं करता। इसलिए मुझे मुख्यमंत्री से मिलना पड़ा। - ममता रावत, शहीद की पत्नी
नहीं मिली खेती की जमीन
मेरे पिता के साथ 11 और जवान भी शहीद हुए थे। उनके परिजनों को खेती के लिए जमीन दी गई है, हमें आज तक नहीं मिली। स्मारक की जमीन में भी 100 हिस्सेदार हैं। - विकास रावत, शहीद का पुत्र
उस समय जो वादे किए वे प्रशासन ने पूरे नहीं किए। मैं कई बार डीएम से मिल चुकी हूं। प्रशासन कोई सुनवाई नहीं करता। इसलिए मुझे मुख्यमंत्री से मिलना पड़ा। - ममता रावत, शहीद की पत्नी
नहीं मिली खेती की जमीन
मेरे पिता के साथ 11 और जवान भी शहीद हुए थे। उनके परिजनों को खेती के लिए जमीन दी गई है, हमें आज तक नहीं मिली। स्मारक की जमीन में भी 100 हिस्सेदार हैं। - विकास रावत, शहीद का पुत्र
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जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
62 लाख रुपये दिए जा चुके हैं
परिवार को हमने अलग-अलग माध्यम से करीब 62 लाख रुपये दिए हैं। 2.50 लाख रुपये मूर्ति के लिए अलग से दिए। गांव में पट्टे की जमीन उपलब्ध नहीं है। स्कूल व सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
परिवार को हमने अलग-अलग माध्यम से करीब 62 लाख रुपये दिए हैं। 2.50 लाख रुपये मूर्ति के लिए अलग से दिए। गांव में पट्टे की जमीन उपलब्ध नहीं है। स्कूल व सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी