14 साल तक मुगलिया सल्तनत की राजधानी रही फतेहपुर सीकरी में एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) ने उत्खनन में निकलीं 12 दुकानों को संरक्षित किया है। नौबतखाना और आगरा गेट के बीच मुगलिया बाजार में दो मंजिला दुकानों का उत्खनन जनवरी में शुरू किया गया था, जिसमें दुकानों का मुख्य सड़क के पीछे होना पुरातत्वविदों को चौंका रहा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार के निर्देशन में सहायक पुरातत्वविद प्रमोद चंद पांडेय ने जनवरी में नौबतखाना और आगरा गेट के बीच उत्खनन शुरू कराया था, तब इसमें 12 दुकानें निकलीं, जो दो मंजिला थीं। उत्खनन में कई खिलौने और बर्तनों के टुकड़े भी मिले थे।
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उत्खनन में निकली दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई ने अप्रैल तक उत्खनन के बाद संरक्षण कार्य शुरू किया जो अब पूरा हो गया। ये दुकानें छह फुट मिट्टी में दबी हुई थीं। जो दुकानें मिली हैं, वो मुख्य सड़क के आगे नहीं, बल्कि पीछे हैं। आम तौर पर दुकानों का दरवाजा सड़क की ओर होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है।
पुरातत्वविद् मान रहे हैं कि संभवत ये दुकानें किसी ऐसे उत्पाद की रही होंगी, जिन्हें किले के अंदर के बाजार में नहीं रखा गया। एक अन्य तर्क ये है कि यह किसी चौक का भी हिस्सा हो सकती हैं, जिसमें बीच में आंगन के साथ चारों ओर दुकानें रहीं हों। फिलहाल यह दुकानें किसी पहेली से कम नहीं है।
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उत्खनन में निकलीं दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
सीकरी में एएसआई दो बार उत्खनन करा चुका है। 1976-77 और 1999-2000 के बीच यहां उत्खनन में कई पुरावशेष मिले, जिनमें 1010 ई. की जैन सरस्वती की प्रतिमा सबसे शानदार रही है। एएसआई इसी प्रतिमा की रेप्लिका ताज आए विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को देता है।