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सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल रामलीला, पांच पीढ़ियों से रावण का पुतला बना रहा मुस्लिम परिवार

Mon, 15 Oct 2018 05:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Mon, 15 Oct 2018 05:07 PM IST
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Muslim family preparing effigy of Ravana for Dussehra in agra
रावण, मेघनाद, कुंभकरण का पुतला बनाते कारीगर - फोटो : अमर उजाला
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या में मंदिर को लेकर बेशक राजनीति हो रही हो लेकिन तमाम लोग ऐसे हैं जिनकी रोजी रोटी रामलीला पर ही  आश्रित है। मथुरा निवासी जाफर अली पिछले 40 वर्ष से आगरा की रामलीला में रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण आदि के पुतले बना रहे हैं। उनका कहना है कि  राम मंदिर पर लड़ाई का कोई मतलब नहीं है। कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए इसे मुद्दा बनाए हुए हैं। रामलीला से हमारे परिवार का पेट पलता है।
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जाफर अली ने बताया कि उनका रामलीला से संबंध मात्र 40 वर्ष का नहीं है, हमारी पांचवीं पीढ़ी राम की सेवा कर रही है। यह परिवार का पुश्तैनी काम है। परिवार के सभी सदस्य रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण आदि के पुतले बनाने के काम में लगे हैं। केवल आगरा ही नहीं मथुरा, दिल्ली, सूरत, मुंबई तक पुतले बनाने जाते हैं। 
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जाफर अली ने कहा कि धर्म के नाम पर वही लड़ते हैं, जिनका पेट भरा है और करने को कुछ नहीं है। अन्यथा गरीब का एक ही धर्म है वह है मेहनत से कमाई हुई रोटी। उनके परिवार के लोग सूरत और मुंबई की रामलीला के लिए पुतले बना रहे हैं। जाफर अली बताते हैं कि पुतले बनाने का काम मजदूरी पर करते है। रामलीला कमेटी ही सामग्री उपलब्ध कराती है। इस काम में करीब एक महीने का समय लगता है। अलग-अलग पुतले बनाए जाते हैं।
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आगरा में रावण का पुतला बनाने के लिए जाफर के साथ पांच मजदूर लगे हैं। उन्होंने बताया कि सामग्री तो महंगी हो गई लेकिन उनका मेहनताना नहीं बढ़ा। कमेटी वालों से कहो तो वे आर्थिक संसाधनों की कमी का रोना रोने लगते हैं। जाफर अली ने कहा कि हम भी श्रीराम की सेवा समझते हैं, जो मेहनताना मिलता है, उसी में काम करते हैं। 

इस बार बिजलीघर स्थित रामलीला मैदान में विजयदशमी को रावण का 100 फुट का पुतला जलाया जाएगा। जाफर अली ने बताया कि पिछली बार 90 फुट  का पुतला था। पुतले में आतिशाबाजी के आइटम आतिशबाज चमन मंसूरी लगाएंगे। कुछ अहम आइटमों की जानकारी देते हुए बताया कि रावण जलने के पहले उसकी आंखों से चिंगारियां निकलेंगी। उसके मुकुट पर लगा चक्र घूमेगा और गिरने से पहले रावण ठहाके लगाएगा। मेघनाद का पुतला 60 फुट और  कुंभकर्ण का पुतला 30 फुट ऊंचा होगा। 
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