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छत्रपति शिवाजी ने आगरा में ही लिया था स्वतंत्र राज्य का संकल्प, गौरवशाली है इतिहास

Wed, 16 Sep 2020 07:38 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 16 Sep 2020 07:38 AM IST
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Mughal Museum News: Chhatrapati Shivaji's historic escape from Agra
आगरा किले के सामने लगी शिवाजी की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी का मुगल म्यूजियम अब छत्रपति शिवाजी के नाम से जाना जाएगा। इसमें शिवाजी का इतिहास भी दर्ज होगा। यह आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जारी किया है। आगरा से शिवाजी का गहरा नाता रहा है। वर्ष 1667 में जब मुगल बादशाह औरंगजेब ने शिवाजी राजे को कैद कर लिया तो उन्होंने संकल्प लिया कि आजाद होने के बाद स्वतंत्र राज्य की स्थापना करेंगे। वह सवा महीने आगरा में नजरबंद रहे थे और फिर आजाद होने के बाद इतने ही दिन मथुरा में चौबेजी का कटरा में रहे।
Mughal Museum News: Chhatrapati Shivaji's historic escape from Agra
शिवाजी के नाम पर होगा आगरा का म्यूजियम - फोटो : अमर उजाला
इतिहासकार सुगम आनंद ने बताया कि औरंगजेब के वजीर मिर्जा राजा जय सिंह और शिवाजी राजे में युद्ध के बाद वर्ष 1665 में पुरंदर की संधि हुई। इसमें शिवाजी को 23 किले देने पड़े। तय हुआ था कि शिवाजी औरंगजेब से दरबार में मिलेंगे, उन्हें उच्च पद या बड़ा मनसब दिया जाएगा। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जय सिंह ने ली थी।

वर्ष 1666 में शिवाजी आगरा आए। सेवला रोड पर सराय गुलाबचंद में उन्होंने डेरा डाला। जय सिंह के बेटे कुंवर राम सिंह ने एक लाख रुपये भेंटकर उनका स्वागत किया। नगर की सीमा से बाहर (कोठी मीना बाजार के पास आज जहां जयपुर हाउस है) कुंवर राम सिंह की छावनी में शिवाजी ठहरे। यह स्थान आज भी अभिलेखों में कटरा सवाई राजा जय सिंह के नाम दर्ज है।
Mughal Museum News: Chhatrapati Shivaji's historic escape from Agra
इतिहासकार सुगम आनंद - फोटो : अमर उजाला
दरबार से नाराज होकर चले गए थे शिवाजी

शिवाजी को औरंगजेब के दरबार में उचित सम्मान नहीं मिला, उन्हें पांच हजारी मनसबदारों के साथ खड़ा कर दिया गया। इस पर शिवाजी नाराज होकर चले गए। अफजल खां (जो शिवाजी के हाथों मारा गया था) की विधवा और रोशनआरा (शाहजहां की बेटी) ने औरंगजेब के कान भर दिए थे। कहा जाता है कि इसलिए औरंगजेब ने शिवाजी को सम्मान नहीं दिया।
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शिवाजी महाराज की प्रतिमा
फिदाई हुसैन की हवेली में रखे गए थे शिवाजी

इतिहासकार राज किशोर राजे बताते हैं कि  शिवाजी फिदाई हुसैन की हवेली में नजरबंद रहे थे। यह स्थान आज कोठी मीना बाजार है। शिवाजी 12 मई, 1666 को मुगल दरबार में गए और नाराज होकर लौटे। औरंगजेब के हुक्म पर उन्हें पहले कुंवर राम सिंह की छावनी (इस जगह पर अब जीएसटी विभाग का दफ्तर है) के निकट के शिविर में नजरबंद कर सिद्धी फौलाद खां की निगरानी में रखा गया। 

16 मई को रदन्दाज खां के मकान पर ले जाने का आदेश हुआ। नजरबंदी के लिए एक हजार सैनिकों और तोपों की तैनाती की गई। औरंगजेब ने राम सिंह से कहा कि  शिवाजी को अपने घर से दूर रखे। इसके बाद शिवाजी को राम सिंह के शिविर से थोड़ी दूर फिदाई हुसैन की हवेली में रखा गया, जो कि टीले यानी अब के कोठी मीना बाजार पर स्थित थी। 
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म्यूजियम की इमारत - फोटो : अमर उजाला
विट्ठलनाथ की हवेली में न ले जा पाए 

औरंगजेब चाहता था कि शिवाजी किले के पास रहें ताकि निगरानी और कड़ी हो सके। इसलिए उसने जामा मस्जिद के निकट स्थित विट्ठलनाथ की हवेली में लाने का हुक्म दिया, लेकिन इससे पूर्व ही सैनिकों की आंखों में धूल झोंक वह अपने पुत्र संभाजी के साथ मिठाई की टोकरी में बैठकर औरंगजेब की कैद से निकल गए। यहां से मथुरा पहुंचे और वहां सवा महीने चौबेजी का कटरा में रहे। सुगम आनंद बताते हैं कि आगरा में ही शिवाजी ने यह संकल्प ले लिया था कि वह अपना स्वतंत्र राज्य बनाएंगे। उन्होंने इसे पूरा किया। 
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