मथुरा के बुलियन कारोबारी नीरज अग्रवाल, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की हत्या के सात महीने बाद पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के बयान दर्ज किए हैं। दो महीने पहले विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा की रिपोर्ट पुलिस को मिल गई थी, लेकिन इसे दबाए रखा गया। पीड़ित परिवार लगातार अफसरों के चक्कर काटता रहा, तब जाकर पुलिस ने जांच शुरू की है। अगली स्लाइड्स में पढ़िए पूरा घटनाक्रम....
बुलियन काराबोरी हत्याकांड: पुलिस ने सात महीने बाद दर्ज किए आरोपियों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट दबाई
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यह था मामला
एक जनवरी 2020 की सुबह एक्सप्रेसवे के अंडरपास के नीचे आरएस बुलियन फर्म के मालिक नीरज अग्रवाल की कार मिली थी। बंद गाड़ी में नीरज अग्रवाल, उनकी पत्नी नेहा अग्रवाल और पुत्री धान्या के शव व पुत्र शौर्य घायल हालत में था। सबके गोली लगी थी। पुलिस ने घटना को आत्महत्या मानकर चल रही थी। बाद में नीरज के साले अमित अग्रवाल ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। थाना जमुनापार में दर्ज रिपोर्ट में मनीष व आशीष चतुर्वेदी निवासी महाविद्या कॉलोनी, नीरज चतुर्वेदी निवासी रतनकुंड और आशीष अरोड़ा निवासी कृष्णा नगर मथुरा को नामजद किया गया था। उनसे घटना के संबंध में पूछताछ कर वारदात के समय की लोकेशन आदि की जानकारी ली। लखनऊ फारेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट ने पुलिस की आत्महत्या संबंधी आशंका की पुष्टि कर दी। इसके बाद थानाध्यक्ष से लेकर आला अधिकारी तक ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
'हम केस का अध्ययन कर रहे हैं'
मथुरा के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि लखनऊ और आगरा से जो फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आई है उनमें विरोधाभास है। हम फिलहाल दोनों का अध्ययन कर रहे हैं। इसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे।
एक पिस्टल से तीन गोलियां चलीं, दूसरी से एक
बुलियन कारोबारी और उनके परिवार के तीन लोगों की हत्या के लिए चलाई गईं चार गोलियों में से तीन एक पिस्टल से चली थीं और एक दूसरी से। इनके खोखे कार में मिले थे। चारों को एक-एक गोली मारी गई थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह बताया गया कि तीन गोलियों पर पिस्टल की पिन के एक जैसे निशान थे, एक गोली पर निशान अलग था। पुलिस यह मानकर चल रही थी कि नीरज अग्रवाल ने पहले बच्चों और बीवी की हत्या की और फिर खुदकुशी। मौके पर एक ही पिस्टल मिली थी जो नीरज की थी। अब साफ हो गया कि पिस्टल एक और थी जिसे लेकर हत्यारा भाग गया।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा के संयुक्त निदेशक डॉ. एके मित्तल ने बताया कि बुलियन कारोबारी और उनके परिवार की हत्या के मुकदमे में जांच की गई थी। इसकी रिपोर्ट दो महीने पहले मथुरा पुलिस को भेज दी गई थी।
नीरज को अब तो न्याय मिले: अमित
बुलियन कारोबारी नीरज अग्रवाल के साले अमित अग्रवाल ने कहा है कि इतने साक्ष्य हत्या की तरफ इशारा कर रहे हैं फिर भी पुलिस इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। वह चाहते हैं कि अब तो नीरज को न्याय मिल जाए।
आरएस बुलियन सहित कई अन्य फर्म के मालिक नीरज अग्रवाल पर आरोप था कि नोटबंदी के दौरान उन्होंने 250 करोड़ रुपये की हेराफेरी की थी। जिसे लेकर आयकर विभाग भी उन पर लगातार दबाव डाल रहा था। इस पैसे को लेकर जो लोग कभी उनके साथ व्यापार में साझेदारी थे, वो खिलाफ हो गए थे और विवाद बना हुआ था। पुलिस ने वारदात के बाद इस विवाद की जड़ तक में जाना उचित नहीं समझा।
व्यापार में कभी नीरज के साथी रहे मनीष चतुर्वेदी और आशीष अरोड़ा के खिलाफ पूर्व में हुए विवाद की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसी आधार पर नीरज के साले अमित अग्रवाल ने थाना जमुनापार में मनीष व आशीष चतुर्वेदी निवासी महाविद्या कॉलोनी, नीरज चतुर्वेदी निवासी रतनकुंड तथा आशीष अरोड़ा निवासी कृष्णा नगर मथुरा के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने न तो हत्या के मामले में पूरी जांच की और न ही आत्महत्या के मामले में अपनी जांच पूरी की।