{"_id":"63a95f18a1c2821b88176692","slug":"martyr-bhupendra-singh-was-not-only-an-ideal-but-also-a-guide-for-the-youth-of-the-village","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"शहीद को दी अंतिम विदाई: गांव के युवाओं के आदर्श ही नहीं मार्गदर्शक भी थे शहीद भूपेंद्र सिंह, हर आंख हुई नम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहीद को दी अंतिम विदाई: गांव के युवाओं के आदर्श ही नहीं मार्गदर्शक भी थे शहीद भूपेंद्र सिंह, हर आंख हुई नम
Mon, 26 Dec 2022 02:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 26 Dec 2022 02:15 PM IST
विज्ञापन
शहीद भूपेंद्र सिंह के परिजनों का रो-रोकर हुआ बुरा हाल
- फोटो : अमर उजाला
सिक्किम सड़क हादसे में शहीद हुए एटा के लांस नायक भूपेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर रविवार दोपहर को गांव ताजपुर अद्दा में पहुंचा। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। जब तक सूरज चांद रहेगा भूपेंद्र तुम्हारा नाम रहेगा, जैसे नारे गूंज उठे। शहीद की पत्नी व अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवहन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और जिले के अफसरों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ शहीद भूपेंद्र का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद लांसनायक भूपेंद्र सिंह गांव के युवाओं के आदर्श ही नहीं मार्गदर्शक भी थे। जब भी छुट्टियों में आते, तो सेना भर्ती की तैयारियों के तरीके और बारीकियां समझाते थे। युवाओं का कहना है कि वक्त ने उसने एक अच्छा मार्गदर्शक छीन लिया।
शहीद के घर में मची चीत्कार
- फोटो : अमर उजाला
सिक्किम में शुक्रवार को सेना का वाहन खाई में गिरने से 16 जवानों की जान गई थी। इनमें अलीगंज ब्लॉक क्षेत्र के गांव ताजपुर अद्दा के रहने वाले लांस नायक भूपेंद्र सिंह भी थे। शनिवार को उनका पार्थिक शरीर सेना के विमान से आगरा लाया गया। रविवार सुबह सड़क मार्ग से पार्थिव शरीर को गांव ताजपुर अद्दा में लाया गया।
शहीद को श्रद्धांजलि देने उमड़े हजारों लोग
- फोटो : अमर उजाला
गांव के युवाओं ने बताया कि गांव में लगभग 300 घर हैं। आबादी करीब 2500 की है। बीस लोग सेना में सेवाएं दे रहे हैं या दे चुके हैं। अकेले भूपेंद्र सिंह के परिवार से उनके बाबा, पिता, चाचा, ताऊ व चचेरे भाई सेना में रहे हैं। भूपेंद्र ने फर्रुखाबाद जनपद के कायमगंज में स्थित सीपी विद्या निकेतन से इंटर तक पढ़ाई की।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहीद लांस नायक भूपेंद्र सिंह
- फोटो : अमर उजाला
बाबा व पिता को सेना में देखकर अपना भी यह लक्ष्य तय किया। नौजवानों ने बताया कि शहीद भूपेंद्र जब छुट्टी पर आते थे तो कैसे भर्ती होना है। क्या-क्या करना पड़ता है आदि जानकारी देते थे। सेना में जाने के लिए प्रोत्साहित करते थे। शारीरिक व्यायाम सहित ट्रेनिंग के दौरान क्या रहता है, इसकी जानकारी देते थे।
विज्ञापन
शहीद के पार्थिव शरीर के पास बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
गंगाधर ने बताया कि शहीद भूपेंद्र को बचपन से ही सेना से लगाव था। छुट्टी पर आने के बाद वह नौजवानों को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उन्हें तैयारी के साथ कई कहानियां ऐसी सुनाते थे कि नौजवान सेना में जाने को तैयार हो जाते थे। वहीं कुलदीप सिंह ने बताया कि शहीद लांसनायक भूपेंद्र के बाबा ने चीन से युद्ध लड़ा था। शहीद भूपेंद्र जब छुट्टी पर घर आतेेे थे, नौजवानों को सेना की जाबांसी के किस्से सुनाते थे। वहीं सेना में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रशिक्षण भी देते थे।