भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा नगर के प्राचीन मंदिरों में से एक ठा. मदनमोहन मंदिर का 49 लाख रुपए से संरक्षण कार्य किया जा रहा है। कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा मंदिर के मेहराव, जगमोहन की छत, पाथ वे, दीवारों की मरम्मत की जा रही है।
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मदनमोहन मंदिर पर काम करते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
मुल्तान निवासी रामदास खत्री एवं कपूरी नामक व्यापारी ने संभवत: 1590 से 1627 के बीच में ठा. मदनमोहन मंदिर का निर्माण कराया गया था। काफी ऊंचाई पर स्थित विशाल लाल बलुआ पत्थर से बने मंदिर के जगमोहन की दीवार, मेहराव, छत, छज्जे, मंदिर परिसर की दीवार, बाउंड्रीवाल व पाथ वे की मरम्मत का काम किया जा रहा है।
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मदनमोहन मंदिर को प्राचीन रूप देने में जुटे कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
इस कार्य के लिए 40 कर्मचारियों द्वारा एएसआई के वरिष्ठ संरक्षक सहायक रामरतन के निर्देशन में किया जा रहा है। मंदिर को संरक्षित व मरम्मत कार्य के लिए धौलपुर से रेड सेंड स्टोन, आगरा से पुरानी ककैया ईंट लाई गई हैं।
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एएसआई के अधिकारी मंदिर के कार्य का जायजा लेते हुए
- फोटो : अमर उजाला
वहीं मंदिर की दीवारों में आई दरारों को मोर्टार मसाले से भरा जा रहा है। मंदिर की मरम्मत के लिए राजस्थान के जगनेर, अयोध्या, बिहार, दिल्ली, भरतपुर से कारीगरों को लाया गया है।
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प्राचीन मदनमोहन मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वरिष्ठ संरक्षक सहायक रामरतन का कहना है कि प्राचीन मदनमोहन मंदिर को संरक्षित कार्य 49 लाख रुपए की लागत से किया जा रहा है। यह कार्य करीब तीन माह तक चलेगा। इसे संरक्षित करने के लिए देश के कई क्षेत्रों से विशेष कारीगरों को लाया गया है, जो संरक्षित कार्य में दक्ष हैं।