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World Heritage Week:खतरे में मुगल काल की स्थापत्य कला, जमींदोज हो रहा 'इतिहास'
Wed, 20 Nov 2019 07:37 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 20 Nov 2019 07:37 PM IST
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अकबर टूम (सिकंदरा) 70 साल से उत्तरी गेट का संरक्षण नहीं हुआ
- फोटो : अमर उजाला
मुगल काल की स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूनों में शुमार अकबर टूम (सिकंदरा) उपेक्षा का शिकार है। नतीजा यह है कि इतिहास को समेटे स्मारक के कई हिस्से जमींदोज होते जा रहे हैं। स्मारक का उत्तरी गेट इसका उदाहरण है। संरक्षण के अभाव में इस विशाल गेट का अधिकांश भाग ढह गया है। 70 साल से उत्तरी गेट का संरक्षण नहीं हुआ है।
अकबर टूम
- फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में विश्वदाय स्मारक ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी ही नहीं हैं, दर्जनों ऐसी इमारतें हैं जो इस शहर के वैभवशाली इतिहास की गवाह हैं। अकबर टूम इन्हीं में से एक है। स्मारक में समय-समय पर संरक्षण कार्य तो हुए लेकिन जितनी जरूरत थी उससे बहुत कम।
अकबर टूम (सिकंदरा) टूटे पड़े पत्थर
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों की मानें तो इसके उत्तरी गेट का संरक्षण कार्य पिछले 70 साल से नहीं हुआ। हालांकि 10 साल पहले इसकी मरम्मत के लिए मशक्कत हुई थी। 40 लाख रुपये का प्रस्ताव पास किया गया, सामान भी आ गया था लेकिन कार्य शुरू नहीं हो सका। इस गेट तक पहुंचने के लिए आधे रास्ते तक पाथवे निर्माण का काम जरूर वर्ष 2010 में हुआ था।
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अकबर टाम्ब
- फोटो : अमर उजाला
इतिहास: अकबर टूम आगरा-मथुरा हाईवे पर स्थित है। इतिहासकार इसका निर्माता अकबर को मानते हैं। कुछ भाग अकबर की मृत्यु के बाद उसके पुत्र जहांगीर द्वारा बनवाया गया।
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एत्मादउद्दौला स्मारक, पांच साल से टूटी पड़ी हैं जालियां
- फोटो : अमर उजाला
यमुनापार स्थित एत्मादउद्दौला स्मारक भी रखरखाव के अभाव में बदहाल होता जा रहा है। मुख्य प्रवेश द्वार और स्मारक के पत्थर कई जगह से निकल गए हैं। जालियां भी टूट गई हैं। बताया जा रहा है कि सफेद और लाल पत्थर की जालियां पिछले पांच साल से टूटी हुई हैं। इन्हें अब तक नहीं लगाया गया। कई जगह से पत्थर भी टूट गए हैं।