फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के यमुना किनारे के टीले पर झोपड़ियों का एक गांव गुडियाना। बीहड़ में बसे इस गांव में पेयजल, रास्ते तक इंतजाम नहीं है। धूलभरे कच्चे रास्ते से आने जाने वाले ग्रामीण यमुना का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गांव वाले बताते हैं कि हर चुनाव में उन्हें नेता विकास के सपने दिखाते हैं। पर, अब तक एक भी वादा पूरा नहीं हो सका है। तस्वीरों में देखिए गांव की बदहाली...
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गुडियाना गांव का कच्चा रास्ता
- फोटो : अमर उजाला
जैतपुर ब्लाक में यमुना नदी से 150 गज की दूरी पर टीले पर बसे गुडियाना गांव पहुंचने के लिए बीहड़ करीब पांच किलोमीटर धूलभरे कच्चे रास्ते से होकर जाना पड़ता है। करीब 400 की आबादी वाले गांव के लोगों के पास आवास के नाम पर झोपड़ी ही है।
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मिट्टी के चूल्हे पर बनता है खाना
- फोटो : अमर उजाला
शौचालय, रसोई गैस सिलिंडर तो दूर गांव में सस्तेदर के राशन की दुकान तक नहीं है। लोग राशन लेने के लिए पांच किलोमीटर जाते हैं। गांव की मनको देवी, कमलेश, विमलेश, सीता, कलियान देवी, आशा, चंद्रकांती, सुंदर देवी, राज कुमारी, मंगो देवी, सत्तो जैसी कई महिला परिवार हैं, जिनके पास राशन कार्ड ही नहीं है।
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यमुना से पानी लेकर जातीं गुडियाना की महिलाएं व बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग रामवती, सियादुलारी, रूसो, श्रीदयाल, रामकली, सत्तो देवी, रामलक्षन, जय नारायन को पेंशन नसीब नहीं है। गांव के लोग यमुना का गंदा और प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। शनिवार की दोपहर गांव की महिलाएं बच्चों को यमुना पर नहलाने के लिए ले गई थीं। वहीं से पीने के लिए पानी भी भरकर ले आईं।
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यमुना से पानी लेकर जातीं गुडियाना की महिलाएं व बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
एक साल के बेटे को गोद में लिए यमुना से पानी भर कर घर जा रही आशा ने बताया कि उसका मायका अटेर में है। वहां कस्बा है। शादी के बाद यहां आई तो महीनों रोती रही। मायके वालों को भी खरी खरी सुनाई। आशा बोली मेरे करम फूट गए। यहां पर न कोई सुविधा और न कोई साधन।