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महिला दिवस: आगरा की दो बेटियों के हाथों में होगी रोडवेज की स्टेयरिंग, बोलीं- लड़कियां ट्रेन चला सकती हैं तो बस क्यों नहीं
Sun, 07 Mar 2021 05:25 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 07 Mar 2021 05:25 PM IST
सार
- 19 युवतियों को चयनित किया गया
- आगरा निवासी पूनम, सोनिया शामिल
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सोनिया और पूनम के फोटो बाएं से दाएं क्रमश:
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा जनपद में रोडवेज बसों में महिला चालक भी स्टेयरिंग थामेंगी। परिवहन निगम के मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कानपुर में आगरा की दो लड़कियां पिंक बसों की ड्राइविंग के लिए तैयार होंगी। 25 फरवरी से उनका प्रशिक्षण शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन के तहत महिलाओं को भारी वाहन चलाने के कोर्स पर शासन से सैद्धांतिक अनुमति मिल चुकी है।
महिलाओं के लिए पिंक बस
- फोटो : amar ujala
चयनित महिलाओं को पिंक बसों के संचालन के लिए कानपुर स्थित इंस्टीट्यूट में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इनके ड्राइविंग लाइसेंस भी परिवहन निगम बनवाएगा। पहले हल्के और फिर भारी वाहन का लाइसेंस बनवाया जाएगा। पहले चरण में जिन 19 युवतियों को चयनित किया गया, उनमें आगरा निवासी पूनम, सोनिया शामिल हैं।
बस चलाने के लिए चयनित हुईं पूनम
- फोटो : अमर उजाला
मां से मिला संबल, उत्साहित हूं
मां रेखा शर्मा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जब इस प्रशिक्षण के बारे में जानकारी हुई तो मैंने भी बस का संचालन सीखने की ठान ली। मां से संबल मिला। अब प्रशिक्षण शुरू हो गया है। हाईस्कूल कर चुकी हूं। पहले चरण में चयनित होने पर खासी उत्साहित हूं। -पूनम शर्मा, रामबाग, आगरा
मां रेखा शर्मा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जब इस प्रशिक्षण के बारे में जानकारी हुई तो मैंने भी बस का संचालन सीखने की ठान ली। मां से संबल मिला। अब प्रशिक्षण शुरू हो गया है। हाईस्कूल कर चुकी हूं। पहले चरण में चयनित होने पर खासी उत्साहित हूं। -पूनम शर्मा, रामबाग, आगरा
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बस चलाएंगी सोनिया शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
ट्रेन चला सकती हैं तो बस क्यों नहीं
इंटरमीडिएट कर चुकी सोनिया कहती हैं कि वह एक्टिवा चलाती हैं। जब लड़कियां प्लेन और ट्रेन चला सकती हैं तो बस क्यों नहीं चला सकती हैं। कौशल विकास मिशन के तहत होने वाली ट्रेनिंग से उत्साहित हूं। अब जल्द ही बस चलाना चाहती हूं। -सोनिया शर्मा, यमुनापार, आगरा
इंटरमीडिएट कर चुकी सोनिया कहती हैं कि वह एक्टिवा चलाती हैं। जब लड़कियां प्लेन और ट्रेन चला सकती हैं तो बस क्यों नहीं चला सकती हैं। कौशल विकास मिशन के तहत होने वाली ट्रेनिंग से उत्साहित हूं। अब जल्द ही बस चलाना चाहती हूं। -सोनिया शर्मा, यमुनापार, आगरा
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रोडवेज की पिंक बस
- फोटो : अमर उजाला
सात महीने का होगा प्रशिक्षण
महिला परिचालक तो रोडवेज में हैं मगर चालक नहीं थीं, अब इस योजना को भी सरकार ने मूर्त रूप देने की मंजूरी दे दी है। इससे महिला सवारियां खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी। महिलाओं को दो चरणों में पहले चरण में 200 व दूसरे चरण में 400 घंटे की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण करीब सात महीने चलेगा। इसके बाद इनको रोडवेज बस की स्टेयरिंग थमाई जाएगी। -एसपी सिंह, प्रधानाचार्य, मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कानपुर
महिला परिचालक तो रोडवेज में हैं मगर चालक नहीं थीं, अब इस योजना को भी सरकार ने मूर्त रूप देने की मंजूरी दे दी है। इससे महिला सवारियां खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी। महिलाओं को दो चरणों में पहले चरण में 200 व दूसरे चरण में 400 घंटे की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण करीब सात महीने चलेगा। इसके बाद इनको रोडवेज बस की स्टेयरिंग थमाई जाएगी। -एसपी सिंह, प्रधानाचार्य, मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कानपुर