महिला दिवस: बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए मुंद्रा देवी बन गईं कुली, हौसलों से दे रहीं मुश्किलों को मात
- आगरा रेल मंडल की पहली महिला कुली हैं मुंद्रा देवी,
- कहा- बच्चों को नहीं खाने दूंगी ठोकर, पढ़ते हैं तीनों बच्चे
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आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर मुंद्रा देवी 12 साल से संघर्ष कर रही हैं। वह बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए स्टेशन पर कुली बनकर बोझ उठा रही हैं। बोझ उठाने में वह किसी पुरुष कुली से कमतर नहीं हैं। वह आगरा रेल मंडल की पहली महिला कुली हैं। हालांकि आज तक उन्हें इसका कोई फायदा हासिल नहीं हो पाया है।
किरावली के गांव विद्यापुर की रहने वाली मुंद्रा देवी ने घर की खराब आर्थिक हालात को देखकर मेहनत मजदूरी करने की ठानी। पढ़ाई लिखाई नहीं की थी, ऐसे में उन्होंने वर्ष 2008 में कुली की भर्ती के लिए आवेदन कर दिया। नंबर मिला 21। तभी से वह कुली नंबर 21 यानी दूसरों से खुद को इक्कीस बनाने के लिए जुट गईं।
फब्तियां कसते थे साथी
मुंद्रा देवी बताती हैं कि जब वह कुली की वर्दी पहनकर आगरा कैंट स्टेशन पहुंची तो साथी कुलियों ने खूब मजाक उड़ाया। कहते थे कि यह चलती ट्रेन से यात्रियों का सामान उठा पाएगी। वह अकसर फब्तियां कसते थे, लेकिन कभी इसकी परवाह नहीं की, अपना काम करती रहीं। अब सभी पुरुष कुली न केवल सहयोग करते हैं बल्कि उनकी इज्जत भी करते हैं।
बच्चों को नहीं खाने दूंगी ठोकर, पढ़ते हैं तीनों बच्चे
मुंद्रा देवी बताती हैं कि उनके दो बेटे और एक बेटी है। तीनों को ही वह स्कूल भेजती हैं। कहती हैं कि अगर पढ़ी लिखी होती तो शायद कुछ दूसरा काम कर रही होती। अब बच्चों को ठोकरें नहीं खाने देंगी, इसलिए उन्हें पढ़ा रही हैं।
लॉकडाउन में छिनी पति की नौकरी
मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण के कारण देशभर में लॉकडाउन लगाया गया तो उनके पति की नौकरी भी छूट गई। वह जूता फैक्टरी में नौकरी करते थे। ट्रेनों का संचालन भी बंद था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी, स्पेशल ट्रेनें कम हैं, लेकिन वह पूरे दिन इसी इंतजार में स्टेशन पर बिता देती हैं कि कोई यात्री तो आएगा जोकि सामान उठवाएगा। अब हालात बदल रहे हैं, ट्रेनें बढ़ने से कुछ आमदनी बढ़ने लगी है।