{"_id":"6a97903c8e5205cb1b064278","slug":"90-year-old-man-who-willed-crores-worth-property-to-dm-gets-setback-appeal-against-son-dismissed-2026-09-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: जिलाधिकारी के नाम कर दी करोड़ों की संपत्ति, फिर भी न मिला अपना घर; 90 साल की उम्र में कानूनी झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: जिलाधिकारी के नाम कर दी करोड़ों की संपत्ति, फिर भी न मिला अपना घर; 90 साल की उम्र में कानूनी झटका
Wed, 02 Sep 2026 08:25 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 02 Sep 2026 08:25 AM IST
सार
करोड़ों की संपत्ति जिलाधिकारी के नाम वसीयत करने वाले 90 वर्षीय गणेश शंकर पांडेय को बेटे से मकान खाली कराने की कानूनी लड़ाई में झटका लगा है। डीएम अदालत ने उनकी अपील खारिज करते हुए कहा कि संपत्ति विवाद पहले से सिविल कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
बुजुर्ग गणेश शंकर पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कुछ साल पहले अपनी करोड़ों की संपत्ति जिलाधिकारी के नाम करने की वसीयत लिखकर चर्चा में आए 90 वर्षीय बुजुर्ग गणेश शंकर पांडेय को कानूनी लड़ाई में बड़ा झटका लगा है। बेटे पर मकान पर अवैध कब्जा करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए दायर की गई अपील को जिलाधिकारी अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि दीवानी (सिविल) न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण इस न्यायाधिकरण से कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
पीपल मंडी थाना छत्ता निवासी गणेश शंकर पांडेय ने अपर नगर मजिस्ट्रेट (द्वितीय) के 11 नवंबर 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी संपत्ति से ताला तुड़वाने की मांग को सिविल प्रकृति का मानकर दीवानी अदालत जाने की सलाह दी गई थी। बुजुर्ग का आरोप था कि उनके बेटे दिग्विजय सिंह पांडेय ने निराला बाग स्थित मकान के गेट का ताला तोड़कर अपना ताला डाल दिया है और उन्हें अपने ही घर से बेदखल कर दिया है। पीड़ित बुजुर्ग पिछले कई वर्षों से अपने भाई के घर में रहने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पत्रावली और साक्ष्यों का गहनता से अनुशीलन किया। विपक्षी (बेटे) के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि विवादित संपत्ति का मामला सिविल जज (जूनियर डिवीजन) आगरा की अदालत में पहले से विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 27 फरवरी 2026 को तय है। साथ ही उच्च न्यायालय इलाहाबाद की विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा गया कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम-2007 के तहत यदि भरण-पोषण की मांग नहीं की गई है, तो केवल संपत्ति से बेदखली की याचिका पोषणीय नहीं है।
जिलाधिकारी अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता ने वादपत्र में भरण-पोषण भत्ते की कोई मांग नहीं की है, बल्कि केवल संपत्ति का ताला खुलवाने और निर्माण कार्य से रोकने की मांग की है। मामला शुद्ध रूप से दीवानी प्रकृति का है और सिविल कोर्ट में मामला लंबित रहते इस न्यायाधिकरण से कोई आदेश पारित करना विधिसंगत नहीं होगा। अदालत ने अपर नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराते हुए अपील का निस्तारण कर दिया। हालांकि, बुजुर्ग की जान-माल की सुरक्षा के संबंध में थानाध्यक्ष छत्ता को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी रखे गए हैं।