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चंबल में बाढ़: संकट में 20 हजार लोग...अंधेरे में 38 गांव, फसलें हुईं तबाह, घरों में आई दरारें; देखें तस्वीरें
Sun, 03 Aug 2025 02:31 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 03 Aug 2025 02:31 PM IST
सार
चंबल में बाढ़ से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। संपर्क मार्ग कट गए हैं। लोगों के घरों में दरारें आ गईं हैं। प्रशासन की ओर से मदद पहुंचाने का कार्य जारी है।
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चंबल में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चंबल में आई बाढ़ की विभीषिका से बाह तहसील के 38 गांवों की 20 हजार की आबादी जूझने को मजबूर है। गांव अंधेरे में हैं। रास्तों में पानी भरा होने से बाहर निकलना मुश्किल है। 3 हजार से ज्यादा रकबे में बाजरा, तिल और सब्जियों की फसलें तबाह होने का अंदेशा है। शनिवार को बाह के एसडीएम ने बाढ़ से मकान, कृषि के नुकसान के आंकलन के लिए कर्मियों को लगाया। जो गांव और खेत खाली हुए हैं, उनमें नुकसान का आंकलन तत्परता से करने के निर्देश दिए हैं।
चंबल में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बृहस्पतिवार को चंबल नदी ने खतरे के निशान 130 मीटर को पार कर 134 मीटर का निशान छू लिया था। राहत की बात ये है कि दो दिन में 8.5 मीटर की गिरावट के साथ नदी का जलस्तर 127.5 मीटर रह गया है। पुरा डाल और पुरा शिवलाल गांव का रास्ता खुल गया है। बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे बाह के गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, मऊ की मढै़या, झरनापुरा, भगवानपुरा, पिनाहट के रेहा, कछियारा, डगोरा के लोग अपने गांव का रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
टीले पर डाला लोगों ने डेरा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासन ने बचाव और राहत के लिए रानीपुरा, भटपुरा, गोहरा, सिमराई, झरनापुरा, रेहा के लिए मोटरबोट की व्यवस्था की है। गुढ़ा गांव के रास्ते में कीचड़ होने से मोटरबोट का संचालन बंद हो गया है। उधर, गांव उमरैठापुरा के ग्रामीण रामनरेश, आसारा, देवेंद्र सुनीराम,राजकुमार,अभिलाष राजेंद्र, होशियार सिंह, तहसीलदार, रमेश ,बृजमोहन राजू ने बताया घर में पानी भरने से दीवारों में दरारें आ गई हैं। सीलन के कारण कुछ घर गिर चुके हैं। बाह के एसडीएम हेमंत कुमार ने बताया कि जलस्तर लगातार घट रहा है। प्रभावित गांवों में रसद पहुंचाई जा रही है।
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बाढ़ में उजड़ गए घर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चंबल नदी की बाढ़ का पानी घरों में भर गया है। खेत में फसलें डूब गई हैं। 3 साल पहले आई बाढ़ का भी मुआवजा नहीं मिला है। भगवानपुरा में टीले पर तंबू तान कर रह रही विमला देवी ने बताया कि बाढ़ ने बाजरा का फसल लील लई, भैया पिछलौऊ मुआवजा मिलौ नांहि। पांचो देवी, नीतू देवी ने बताया कि घरनि में पानी भरि गओ, खेत डूब गए, 3 साल पहले कौ मुआवजा अबै तक मिलौ नांहि। रूपरानी ने बताया कि पिछली बाढ़ में गहस्थी उजड़ गई, अबकी खेत डूब गए, मुआवजा मिलतु नांहि। गोहरा में रामखिलाड़ी, गबड़े, झाऊलाल, राकेश, रामससेवक, तोफान सिंह, महावीर सिंह, रामवीर बघेल, वीर सिंह, गुढ़ा गांव के भोंदे, रनवीर की झोपड़ियां बह गईं। परिवार मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं।
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मोटरबोट का निकालने का प्रयास करते लोग।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिमराई के दलदल में फंसी मोटरबोट, 2 ट्रैक्टर लगाने पड़े
चंबल की बाढ़ में सिमराई से गुढ़ा के लिए मोटरबोट चलाई गई थी। नदी का जलस्तर घटने पर रास्ते में दलदल हो गया है। शनिवार को कीचड़ में मोटरबोट फंस गई। उसे निकालने के लिए ट्रैक्टर लगाया, लेकिन निकालने में ट्रैक्टर भी फंस गया। दूसरा ट्रैक्टर लाना पड़ा। तब कहीं जाकर 5 घंटे में मोटरबोट को निकाला जा सका।
चंबल की बाढ़ में सिमराई से गुढ़ा के लिए मोटरबोट चलाई गई थी। नदी का जलस्तर घटने पर रास्ते में दलदल हो गया है। शनिवार को कीचड़ में मोटरबोट फंस गई। उसे निकालने के लिए ट्रैक्टर लगाया, लेकिन निकालने में ट्रैक्टर भी फंस गया। दूसरा ट्रैक्टर लाना पड़ा। तब कहीं जाकर 5 घंटे में मोटरबोट को निकाला जा सका।