UP Flood News: राजस्थान में हो रही मूसलाधार बारिश से चंबल नदी के किनारे बसे बाह और पिनाहट के 12 गांवों में बृहस्पतिवार को बाढ़ आ गई। इन गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया। राहत और बचाव के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने मोर्चा संभाला है। जलमग्न गांव और घर खाली कराए जा रहे हैं। पिनाहट में चंबल खतरे के निशान से 4 मीटर ऊपर 134 मीटर पर बह रही है।
कोटा बैराज से तीन दिन पहले 2.90 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जिससे चंबल का जलस्तर 15 मीटर बढ़ गया। बृहस्पतिवार को 1.60 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ आ गई। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी करते लोगों से सुरक्षित स्थनों पर पहुंचने की अपील की। प्रभावित गांव में बाढ़ राहत सामग्री वितरण कराया। चंबल किनारे बसे गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, झरनापुरा, भगवानपुरा, मऊ की मढ़ैया, रेहा, कछियारा, डगोरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल का तहसील से संपर्क कट गया है। घरों, रास्तों और खेतों में पानी भर गया है। तराई की झोपड़ियां नदी में बह गई हैं।
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डूब गया स्कूल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासन ने बचाव और राहत के लिए रानीपुरा, भटपुरा, गोहरा, सिमराई, झरनापुरा, रेहा के लिए मोटरबोट शुरू कराई है। चंबल की बाढ़ से नदी किनारे बसे 38 गांव प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ में झरनापुरा, कछियारा, रेहा, डगोरा, मऊ की मढै़या, गुढ़ा, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, उमरैठापुरा, क्योरी, बीच का पुरा, भगवानपुरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल गांव में 20 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। करीब तीन हजार हेक्टेयर बाजरा, तिल और सब्जियों की फसल डूब गई है।
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डूब गए घर
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रेहा के प्रधान अजय कौशिक ने बाढ़ से घिरे रेहा, डगोरा, कछियारा के लिए, भगवानपुरा के प्रधान बच्छराज सिंह ने भगवानपुरा, धांधूपुरा के लिए, सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने गुढ़ा के लिए प्रभावित परिवारों के लिए खानपान की व्यवस्था की मांग की है। बाह के एसडीएम हेमंत कुमार, तहसीलदार दयाचंद पौरुष ने बताया कि तीन गांवों गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा में रसद पहुंचाई है। शुक्रवार को अन्य गांवों में रसद पहुंच जाएगी। बचाव राहत के लिए चा मोटरबाेट चलाई गई हैं। विस्थापितों के लिए आठ बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं। नदी किनारे के ग्रामीणों को ऊंचाई वाले इलाकों में पहुंचने के निर्देश दिए हैं।
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गांव में पानी छतों पर लोग
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उजड़े आशियाने, 200 परिवारों का टीले पर डेरा
बाढ़ में आशियाने उजड़े तो तराई के 200 परिवार चंबल के बीहड़ के टीले पर डेरा डालने को मजबूर हो गए। संसाधन वाले परिवार बाढ़ की आहट के साथ ही ट्रैक्टर ट्रॉलियों से अपना सामान लेकर पलायन कर गए थे लेकिन जो परिवार नहीं निकल सके, उनकी गृहस्थी का सामान बाढ़ के पानी से नष्ट हो गया। बचा सामान समेट कर टीले पर पहुंचे परिवारों ने एक बस्ती की तरह अपने तंबू तान लिए हैं। इसके पीछे एक-दूसरे के मन में सुरक्षा का अहसास कराने की भावना रही है। पुरा डाल गांव पूरा खाली हो गया है। गांव के श्यामलाल, एदल सिंह, थान सिंह, भूरे सिंह, पप्पू, नेतराम, होतम सिंह, नाथूराम, नेकराम, रूप सिंह, छत्रपाल, कप्तान सिंह, छोटेलाल, चिरंजीलाल ने अपने खूंटे से पशु खोल कर बीहड़ के टीले पर बांध दिए। खुद तंबू तान लिया है। उन्होंने बताया कि बिजली कटने से अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में खाना बना रहे हैं। बाढ़ ने खेती पूरी तरह से उजाड़ दी है। गांव से निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
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घरों में घुसा पानी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उमरैठा पुरा में अपना आशियाना उजड़ने से प्रभावित 20 परिवारों ने बीहड़ के टीले पर शरण ली है। गांव के भजनलाल, तहसीलदार, राजेन्द्र, होशियार, आशाराम, किशन सिंह, सोनीराम, विनोद ने बताया कि बाढ़ ने पूरी ग्रहस्थी उजाड़ दी है। पशु लेकर बीहड़ के टीले पर रहने को मजबूर हैं। अभी तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। भगवानपुरा के प्रधान बच्छराज सिंह ने बताया कि गांव के 30 परिवारों ने टीले पर शरण ली है। रेहा के प्रधान अजय कौशिक ने बताया कि कछियारा, डगोरा, रेहा के 26 परिवार बीहड़ के टीले पर रहने को मजबूर हैं। सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि गुढ़ा के 12 परिवारों ने टीले पर शरण ली है।