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UP: जर्जर भवन, टपकता पानी, अंधेरे-बदबूदार कमरों में बच्चे परेशान...ये है यूपी के सरकारी स्कूलों का हाल
Fri, 01 Aug 2025 11:17 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 01 Aug 2025 11:17 AM IST
सार
यूपी के सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल है। जर्जर भवन, टपकता पानी और अंधेरे-बदबूदार कमरों में बच्चे परेशान हो रहे हैं।
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यूपी के सरकारी स्कूलों का हाल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शहर से लेकर देहात तक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय विभागीय अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। जर्जर भवनों से कहीं प्लास्टर गिर रहा है तो कहीं छतों से बारिश का पानी टपक रहा है। दीवारें भी गिरासू हैं। मुख्य गेट पर कीचड़ और बदबूदार कमरों से शिक्षक-शिक्षिकाओं का ही नहीं विद्यार्थियों का भी बुरा हाल है। अभिभावक अपने बच्चों की जान खतरे में डालकर विद्यालय में भेजने के लिए मजबूर हैं। कई ब्लाॅक में विद्यालय बंद होने की वजह से दूसरे स्कूलों में पढ़ाई करने जाना पड़ रहा है।
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सरकारी स्कूल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
1 दर्जन से अधिक विद्यालय भवनों की हालत खराब
सैयां ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय खेड़िया कंपोजिट, उच्च प्राथमिक विद्यालय पुसेंता कंपोजिट, प्राथमिक विद्यालय वृथला, प्राथमिक विद्यालय शाहपुर, प्राथमिक विद्यालय भिड़ावली, प्राथमिक विद्यालय सदूपुरा, प्राथमिक विद्यालय बसई खुर्द, प्राथमिक विद्यालय कछपुरा, प्राथमिक विद्यालय दारापुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय महाव में भवनों की स्थिति जर्जर है। छतों से पानी टपक रहा है। हर जगह से प्लास्टर गिर रहा है। विद्यालय में पढ़ने आने वाले बच्चों की जान खतरे में है। कछपुरा के मुन्ना लाल, खेड़िया के भगवान सिंह, दारापुरा के प्रमोद कुमार का कहना है कि सरकार को विद्यालय भवनों की स्थिति की जांच करानी चाहिए। अधिकारियों को निरीक्षण के समय यह सब दिखाई क्यों नहीं देता है।
सैयां ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय खेड़िया कंपोजिट, उच्च प्राथमिक विद्यालय पुसेंता कंपोजिट, प्राथमिक विद्यालय वृथला, प्राथमिक विद्यालय शाहपुर, प्राथमिक विद्यालय भिड़ावली, प्राथमिक विद्यालय सदूपुरा, प्राथमिक विद्यालय बसई खुर्द, प्राथमिक विद्यालय कछपुरा, प्राथमिक विद्यालय दारापुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय महाव में भवनों की स्थिति जर्जर है। छतों से पानी टपक रहा है। हर जगह से प्लास्टर गिर रहा है। विद्यालय में पढ़ने आने वाले बच्चों की जान खतरे में है। कछपुरा के मुन्ना लाल, खेड़िया के भगवान सिंह, दारापुरा के प्रमोद कुमार का कहना है कि सरकार को विद्यालय भवनों की स्थिति की जांच करानी चाहिए। अधिकारियों को निरीक्षण के समय यह सब दिखाई क्यों नहीं देता है।
स्कूल की खराब हालत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गोपालपुरा और नगला बाग में दूसरे विद्यालय का सहारा
जैतपुर के गोपालपुरा गांव का प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर हो चुका है। इस कारण सड़क के दूसरे किनारे पर गांव के जूनियर हाईस्कूल में बच्चे पढ़ने जाते हैं। नगला बाग के जूनियर हाईस्कूल की भी यही हालत है। छत और दीवार दरक गई हैं। प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई कराई जा रही है। बाह में पड़कौली और पटकुइयनपुरा के प्राथमिक विद्यालय की छतें टपकती रहती हैं। बारिश होते ही बच्चों को बरामदे में बैठाना पड़ता है।
जैतपुर के गोपालपुरा गांव का प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर हो चुका है। इस कारण सड़क के दूसरे किनारे पर गांव के जूनियर हाईस्कूल में बच्चे पढ़ने जाते हैं। नगला बाग के जूनियर हाईस्कूल की भी यही हालत है। छत और दीवार दरक गई हैं। प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई कराई जा रही है। बाह में पड़कौली और पटकुइयनपुरा के प्राथमिक विद्यालय की छतें टपकती रहती हैं। बारिश होते ही बच्चों को बरामदे में बैठाना पड़ता है।
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छत का प्लास्टर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छत का प्लास्टर गिरा, बाल-बाल बचे बच्चे
मलपुरा विकास खंड बरौली अहीर के उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट बाद में करीब 6 कमरे ऐसे हैं, जिनका भवन पूरी तरीके से जर्जर हो चुका है। कक्षा 6 में कुछ दिन पहले छत का प्लास्टर भी गिरने से बच्चे बाल-बाल बच गए थे। अब बच्चों को दूसरे कमरे में शिफ्ट किया गया है। प्रधानाचार्य मीनू शंखवार ने बताया कि विद्यालय में 138 छात्र पंजीकृत हैं। भवन के ज्यादातर कमरों में छत से पानी टपकने लगा है। विद्यालय में 6 कमरे जर्जर हैं। बच्चों को जर्जर भवन की ओर नहीं जाने दिया जाता है। कक्षा 6 की छात्रा कृतिका के पिता भूपेंद्र सिंह का कहना है कि करीब 15 साल पहले बने कमरे का प्लास्टर भी गिर रहा है। विद्यालय की मरम्मत होनी चाहिए। बारिश के दिनों में हादसों का डर बना रहता है।
मलपुरा विकास खंड बरौली अहीर के उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट बाद में करीब 6 कमरे ऐसे हैं, जिनका भवन पूरी तरीके से जर्जर हो चुका है। कक्षा 6 में कुछ दिन पहले छत का प्लास्टर भी गिरने से बच्चे बाल-बाल बच गए थे। अब बच्चों को दूसरे कमरे में शिफ्ट किया गया है। प्रधानाचार्य मीनू शंखवार ने बताया कि विद्यालय में 138 छात्र पंजीकृत हैं। भवन के ज्यादातर कमरों में छत से पानी टपकने लगा है। विद्यालय में 6 कमरे जर्जर हैं। बच्चों को जर्जर भवन की ओर नहीं जाने दिया जाता है। कक्षा 6 की छात्रा कृतिका के पिता भूपेंद्र सिंह का कहना है कि करीब 15 साल पहले बने कमरे का प्लास्टर भी गिर रहा है। विद्यालय की मरम्मत होनी चाहिए। बारिश के दिनों में हादसों का डर बना रहता है।
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स्कूल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विद्यालय हो गया बंद, प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के लिए मजबूर
खंदौली ब्लॉक के सोनिगा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह किसी भी समय धराशायी हो सकती है। स्थिति इतनी खराब है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल को एक साल से बंद कर गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर डेरा सपेरा गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। इससे सोनिगा गांव के बच्चों को रोज लंबी दूरी तय कर पढ़ने जाना पड़ रहा है। पूर्व प्रधान सज्जन सिंह ने बताया कि पहले इस विद्यालय में 57 छात्र पढ़ते थे। मगर स्कूल दूर होने के कारण अब केवल 5-6 बच्चे ही वहां जा पा रहे हैं। गांव के रहने वाले भूदेव सिंह ने बताया कि उनके दो बच्चे स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन अब दूरी की वजह से उन्हें प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलाना पड़ा। मलूपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय के कमरों की छत से पानी टपकता है। स्थानीय निवासी दिनेश ने बताया कि उनके तीन बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं लेकिन स्कूल की हालत बेहद खराब है। शौचालय भी जर्जर हो चुके हैं, जिससे बच्चों को भारी परेशानी होती है।
खंदौली ब्लॉक के सोनिगा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह किसी भी समय धराशायी हो सकती है। स्थिति इतनी खराब है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल को एक साल से बंद कर गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर डेरा सपेरा गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। इससे सोनिगा गांव के बच्चों को रोज लंबी दूरी तय कर पढ़ने जाना पड़ रहा है। पूर्व प्रधान सज्जन सिंह ने बताया कि पहले इस विद्यालय में 57 छात्र पढ़ते थे। मगर स्कूल दूर होने के कारण अब केवल 5-6 बच्चे ही वहां जा पा रहे हैं। गांव के रहने वाले भूदेव सिंह ने बताया कि उनके दो बच्चे स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन अब दूरी की वजह से उन्हें प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलाना पड़ा। मलूपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय के कमरों की छत से पानी टपकता है। स्थानीय निवासी दिनेश ने बताया कि उनके तीन बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं लेकिन स्कूल की हालत बेहद खराब है। शौचालय भी जर्जर हो चुके हैं, जिससे बच्चों को भारी परेशानी होती है।