राजस्थान के कोटा और हाडौती अंचल में हो रही तेज बारिश और कोटा बैराज से पानी की निकासी के चलते धौलपुर में चंबल अपने रौद्र रूप में आ गई है। चंबल के जलस्तर में हुई बढोत्तरी से धौलपुर जिले के करीब सौ गांव प्रभावित हुए हैं। प्रभावित गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
146.35 मीटर पहुंचा जलस्तर
धौलपुर में चंबल नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे 146.35 मीटर पहुंच गया। वहीं 1996 में चंबल का जलस्तर 145.54 मीटर पहुंचा था। चंबल नदी के जलस्तर बढ़ने से राजाखेड़ा, सरमथुरा, दिहौली, बाडी एवं धौलपुर इलाके के करीब सौ गांव प्रभावित हुए हैं। इन गांवों तक चंबल का पानी पंहुचने से रास्ते कट गए हैं। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन के साथ में सेना, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस एवं पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा है।
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राहत कार्य में जुटे सेना के जवान
- फोटो : अमर उजाला
डीएम अनिल कुमार अग्रवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को पानी, भोजन के पैकेट एवं आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लोगों को आवश्यक दवा किट उपलब्ध करवाने, मच्छरों से बचने हेतु फॉगिंग करवाने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था कराने सहित पशुओं को टीकाकरण आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर ले जाते सेना के जवान
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा से मेजर मोहित ढांढा की अगुवाई में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंची सेना की 70 सदस्यीय टीम ने तीन नावों के साथ राजाखेडा के महदपुरा इलाके में राहत एवं बचाव कार्य के लिए मोर्चा संभाल रखा है। सेना द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाके में ड्रोन की मदद से भी निगरानी की जा रही है।
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खाने के पैकेट बांटते सिविल डिफेंस के जवान
- फोटो : अमर उजाला
एसडीआरएफ समेत सिविल डिफेंस की टीम ने भी राहत कार्य के लिए मोर्चा संभाल लिया है। ग्रामीणों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। चंबल का जलस्तर बढ़ने के बाद धौलपुर का मुक्तिधाम भी पानी में पूरी तरह से डूब गया है।
कोटा बैराज से निकासी के बाद में धौलपुर जिले में चंबल नदी उफान पर है। कई इलाकों में बाढ़ के हालात बने हैं। बीते तीन दिन से चंबल नदी के जलस्तर में बढोत्तरी हो रही है। धौलपुर जिले में चंबल नदी का सामान्य जलस्तर 119.30 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 129.79 मीटर पर है। चंबल नदी में वर्ष 1996 में सर्वाधिक जलस्तर 145.54 मीटर दर्ज किया गया था, लेकिन इस बार चंबल के जलस्तर ने अपना 26 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।