आगरा जिले में फिर से अपराध की झड़ी लग गई है। लगभग दो महीने वारदात का ग्राफ नीचे जा रहा था। बड़ी घटनाएं तो न के बराबर थीं लेकिन जैसे ही वोट पड़े, वैसे ही अपराधी बेलगाम हो गए हैं। बदमाशों ने 30 घंटे के अंदर तीन बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
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सीकरी में व्यवसायी की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
27 अप्रैल की रात फतेहपुर सीकरी में व्यापारी की डकैती के दौरान हत्या कर दी गई। इसके बाद 28 अप्रैल की रात आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र स्थित एक घर में डाका पड़ा। वहीं दिन अछनेरा क्षेत्र में ढाई कुंतल चांदी लूट ली गई। इन तीन बड़ी वारदात हो जाने से पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं।
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आगरा के एक घर में पड़़ा डाका
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इसका एक कारण यह माना जा रहा है कि पुलिसकर्मियों की संख्या जिले में इन दिनों कम है। 80 फीसदी फोर्स दूसरे जिलों में चुनाव कराने के लिए गई है। पुलिस फोर्स के कम हो जाने का ही बदमाश फायदा उठा रहे हैं। मतदान से पहले तक जगह जगह की जा रही चेकिंग भी बंद हो गई है।
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सीकरी की घटना के संबंध में जानकारी लेते एसएसपी
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बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए चल रहा अभियान धीमा पड़ रहा है। गैंगस्टर, गुंडा एक्ट लगाए जाने का सिलसिला थम गया है। हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन भी अब नहीं किया जा रहा है। जेल में बंदियों के मुलाकातियों पर पहले ही तरह नजर नहीं रखी जा रही है। इन सभी का कारण यही है कि चुनाव के बाद फोर्स कम रह गई है।
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घटनास्थल पर पुलिस
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पुलिस चौकियों का हाल यह है कि कहीं कहीं तो सिर्फ इंचार्ज ही बचे हैं। उनके पास स्टाफ नहीं है। पीआरडी जवानों और होमगार्डो के भरोसे गश्त हो रही है। मारपीट की छोटी मोटी घटना पर तो पुलिस जा ही नहीं रही है। ऐसे में बदमाश बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देने लगे हैं। इससे लोगों में दहशत फैल रही है।