भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक स्थल बटेश्वर को विकास का इंतजार हमेशा रहा, जबकि बटेश्वर से 50 किमी दूर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पैतृक स्थल सैफई में पर्यटन विकास के नाम पर 69 करोड़ रुपये केवल दो साल में ही खर्च कर दिए गए।
तस्वीरें: आज भी बटेश्वर को विकास का इंतजार, 50 किमी दूर सैफई पर बरसा था प्यार
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर में पांच साल में महज 2.70 करोड़ रुपये से मंदिरों के घाट और संपर्क मार्ग ही बनाया जा सका। 101 मंदिरों की नगरी और प्रसिद्ध बटेश्वर मेला लगने के बाद भी पर्यटन विकास के लिए बटेश्वर की जगह सैफई को तरजीह दी गई।
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अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव बटेश्वर स्थित घर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बटेश्वर का अटल स्मृति स्थल के रूप में विकास का एलान किया है, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद भी बटेश्वर का विकास के लिए इंतजार खत्म नहीं हुआ। केंद्र से तो बटेश्वर के लिए मदद मिली नहीं। वहीं प्रदेश में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार ने बटेश्वर की जगह सैफई को प्राथमिकता पर रखा।
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बटेश्वर
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बटेश्वर के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने साल 2014-15 की केंद्रीय योजना में 4.53 करोड़ रुपये पीआईडीडीसी (प्रोडक्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एट डेस्टीनेशंस एंड सर्किट्स) के तहत स्वीकृत किए, लेकिन बजट जारी नहीं किया गया। एक साल बाद योजना बंद होने पर बजट भी वापस ले लिया गया।
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बटेश्वर
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उपेक्षा का आरोप उछला तो तत्कालीन प्रदेश सरकार ने 2017 में 2.70 करोड़ रुपये बटेश्वर पर खर्च किए। इनमें बटेश्वर नाथ मंदिर पर 80 मीटर घाट का निर्माण, दो मंदिरों का संरक्षण, पार्किंग में इंटरलाकिंग टाइल्स, सीसी एप्रोच रोड और टैंक की बाउंड्री का काम कराया गया। सिंचाई विभाग और समाज कल्याण निर्माण निगम को यह काम सौंपा गया।