आगरा जिले के फतेहपुर सीकरी में राजा टोडरमल की बारादरी में उत्खनन कार्य जारी है। बुधवार को यहां खोदाई के दौरान मुगलकालीन बर्तन मिले हैं। इसमें हांडी, ढक्कन, चिलन, हुक्के के अवशेष शामिल हैं। जिन्हें जांच के लिए एकत्र कर लिया गया है। इससे पूर्व यहां पानी का टैंक और फव्वारा मिल चुका है। पुरातत्वविदों का कहना है कि इसकी संरचना बेहतरीन है। उत्खनन में इतिहास से जुड़े कई राज खुलेंगे। बता दें कि राजा टोडरमल शहंशाह अकबर के नवरत्नों में से एक थे। सीकरी में टोडरमल की बारादरी है, जिसमें संरक्षण कार्य चल रहा है।
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फतेहपुर सीकरी में उत्खनन: टैंक-फव्वारा के बाद मिले प्राचीन बर्तन, संरचना देख पुरातत्वविद हैरान
Fri, 22 Jan 2021 12:13 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 22 Jan 2021 12:13 AM IST
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राजा टोडरमल की बारादरी में हो रहा उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
राजा टोडरमल की बारादरी में हो रहा उत्खनन कार्य
- फोटो : अमर उजाला
तीन महीने से भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा टोडरमल की बारादरी के संरक्षण का काम कराया जा रहा है। बारादरी के सामने खाली पडे़ भाग पर कार्य के दौरान कारीगरों को पुराना निर्माण होने का आभास हुआ। इस पर पुरातत्व विभाग ने यहां उत्खनन कार्य शुरू कराया। इस दौरान लाइम प्लास्टर से बना 8.7 वर्ग मीटर क्षेत्रफल एवं 1.1 मीटर गहराई वाला फव्वारे का टैंक मिला। जिसके तीनों ओर खोदाई हो चुकी है।
फतेहपुर सीकरी में उत्खनन में मिले प्राचीन बर्तन
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को अधीक्षण पुरातत्वविद बसंत कुमार स्वर्णकार, सहायक पुरातत्वविद विनय कुमार गुप्ता, जितेंद्र सिंह, अलका एवं संरक्षण सहायक कलंदर बिंद के साथ सीकरी पहुंचे और बारादरी के ठीक सामने वाले भाग में मजदूरों से अपने सामने उत्खनन कराया। इस दौरान सामने वाले भाग में आउटलेट वाली नाली भी मिली है। पुरातत्वविद पता लगाने में लगे हैं कि उक्त टैंक में पानी कहां से आता था। फव्वारे में प्रेशर के लिए पानी ऊंचाई से आना चाहिए। वे उस प्रणाली को भी खोज रहे हैं। टैंक की खोदाई में मुगलकालीन मिट्टी के बने बर्तन, हांडी, ढक्कन, चिलम, हुक्के के साथ बुल के अवशेष मिले।
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राजा टोडरमल की बारादरी में हो रहा उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
उत्साह: बेहतरी प्राचीन संरचना मिली
अधीक्षण पुरातत्वविद बसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि पानी का टैंक और फव्वारा एक बेहतरीन प्राचीन संरचना है। इसके उत्खनन से इतिहास के गर्भ के राज खुलेंगे। बारादरी तक पर्यटकों के पहुंचने के लिए कोई निश्चित संपर्क मार्ग के लिए विभाग द्वारा प्रशासन को पत्र लिखने की बात भी उन्होंने कही। अभी निर्जन स्थान में होने के कारण यहां तक पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं।
अधीक्षण पुरातत्वविद बसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि पानी का टैंक और फव्वारा एक बेहतरीन प्राचीन संरचना है। इसके उत्खनन से इतिहास के गर्भ के राज खुलेंगे। बारादरी तक पर्यटकों के पहुंचने के लिए कोई निश्चित संपर्क मार्ग के लिए विभाग द्वारा प्रशासन को पत्र लिखने की बात भी उन्होंने कही। अभी निर्जन स्थान में होने के कारण यहां तक पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं।
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बारादरी के सामने निकला पानी का टैंक और फव्वारा
- फोटो : अमर उजाला
उम्मीद: और हो सकते हैं फव्वारे
इतिहासकार एवं शिक्षाविद डॉ. अमरनाथ पाराशर का कहना है कि राजा टोडरमल की बारादरी के चारों ओर उत्खनन का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए। इतनी बेहतरीन इमारत के सामने ही नहीं और भी फव्वारे होने चाहिए।
राजा टोडरमल स्मारक समिति सीतापुर के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष संजयपुरी का कहना है कि राजा टोडरमल की बारादरी तक पहुंचने का मार्ग बनाया जाना चाहिए तथा बारादरी के जीर्णोद्धार में समिति को भी शामिल किया जाना चाहिए।
इतिहासकार एवं शिक्षाविद डॉ. अमरनाथ पाराशर का कहना है कि राजा टोडरमल की बारादरी के चारों ओर उत्खनन का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए। इतनी बेहतरीन इमारत के सामने ही नहीं और भी फव्वारे होने चाहिए।
राजा टोडरमल स्मारक समिति सीतापुर के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष संजयपुरी का कहना है कि राजा टोडरमल की बारादरी तक पहुंचने का मार्ग बनाया जाना चाहिए तथा बारादरी के जीर्णोद्धार में समिति को भी शामिल किया जाना चाहिए।