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चीन के मकाऊ में आगरा के युवक की संदिग्ध हालात में मौत, शव भेजने को मांगे दस लाख
Fri, 05 Jul 2019 12:02 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 05 Jul 2019 12:02 AM IST
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अमन शशि आनंद का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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चीन के मकाऊ में नौकरी की तलाश में गए आगरा के अमन शशि आनंद (24) की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिवार ने बेटे का शव लाने के लिए विदेश मंत्रालय से मदद मांगी है। परिजनों का कहना है कि गुरुवार को हांगकांग दूतावास से एक फोन कर एक लाख पांच हजार डॉलर (तकरीबन 9.25 लाख रुपये) की मांग की गई है। इसके बाद ही शव भारत भेजने को कहा गया है।
अमन शशि आनंद के शोकाकुल परिजन
- फोटो : अमर उजाला
छोटा उखर्रा निवासी दिनेश उपाध्याय आगरा फोर्ट स्थित डाकघर में कार्यरत हैं। बेटे अमन ने गुरदासपुर के कालेज से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया था। एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से वह 19 मई को मकाऊ गया। उसके पास नौ जुलाई तक का वीजा था। दिनेश उपाध्याय ने बताया कि एक जुलाई को रात तकरीबन ढाई बजे एक कॉल आया। कॉल अमन की इंडोनेशिया की एक महिला दोस्त का था। उन्होंने कहा कि अमन की मौत हो गई। वह समुंदर में डूब गया था। शव अस्पताल में रखा है।
अमन की मां और बहन
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने अमन के बारे में जानकारी के लिए चीन के दूतावास से संपर्क कराने के लिए विधायक डॉ. जीएस धर्मेश से बात की। उन्होंने सांसद एसपी सिंह बघेल को जानकारी दी। सांसद ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात कर मकाऊ से अमन का शव भारत लाने की मांग की। इस पर चीन स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया गया। दिनेश उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार दोपहर तीन बजे एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने उनसे कहा कि हांगकांग दूतावास से बोल रहे हैं। अमन का शव पहले हांगकांग लाया जाएगा। इसके बाद भारत भेजेंगे। इसमें तकरीबन एक लाख पांच हजार हांगकांग डॉलर का खर्च आएगा। इतने रुपये दिनेश के पास नहीं हैं। परिजन विदेश मंत्रालय की देरी से दुखी है। उनका कहना है कि शव कई दिन पुराना हो चुका है। मकाऊ की एक समाजसेवी अरुणा सिंह ही परिजनों के संपर्क में हैं।
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छोटा उखर्रा स्थित अमन का घर
- फोटो : अमर उजाला
अमन की बहन अदिति शशि आनंद ने बताया कि अमन को कोलकाता और पंजाब के दो एजेंट ने दो लाख रुपये महीने के पैकेज पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। सात लाख रुपये लिए थे। जब अमन मकाऊ पहुंचा तो एक कंपनी के लोगों ने साक्षात्कार लिया। मगर, एजेंट ने कंपनी के लोगों का कमीशन नहीं भेजा था। इस कारण उसकी नौकरी नहीं लगी। तब से वह नौकरी के लिए भटक रहा था। एजेंट ने कई और युवकों को नौकरी का झांसा दिया था। आखिरी बार परिजनों ने अमन से 28 जून को व्हाट्सएप कालिंग से बात की थी।
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अमन द्वारा लिखी गईं कविताएं
- फोटो : अमर उजाला
पिता दिनेश उपाध्याय का कहना था कि एक जुलाई को बेटे से रात नौ बजे बात की थी। तब उसने बताया कि वह अपने कमरे पर आ गया है। तब वह बिल्कुल ठीक था। रात ढाई बजे उसकी मौत की जानकारी दी गई। आखिर उसके साथ क्या हुआ? मां शशि बेटे को एक बार देखने के लिए आंसू बहा रही है। वह एक ही बात कह रही हैं कि कोई एक बार बेटे को ला दें। वह क्यों मुझसे दूर चला गया। एक बार आ गया तो फिर नहीं जाने दूंगी। मां को बेटी संभाल रही है।