आगरा में सिपाही सोनू चौधरी हत्याकांड में दूसरे दिन भी पुलिस अंधेरे में तीर चलाती रही। दो आईपीएस और पांच टीमें जांच में जुटी हैं। इसके बावजूद न तो खनन माफिया का पता चला न उसके गुर्गों का। इतनी जानकारी तक नहीं हो पाई कि हत्यारोपी खेरागढ़ और सैंया के किसी गांव के हैं या फिर राजस्थान के धौलपुर क्षेत्र के। वारदात के समय और भी पुलिसकर्मी मौजूद थे, इसके बावजूद हत्यारोपियों के स्केच तक तैयार नहीं कराए जा सके। यह हाल तब है जबकि बालू की ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकने पर पुलिस पर पहले भी हमले हो चुके हैं। इसके बावजूद खनन माफिया की कोई सूची पुलिस ने तैयार नहीं की।
2 of 6
सिपाही सोनू चौधरी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
खेरागढ़ के गांव सोन के बड़ा नगला में रविवार तड़के चार बजे सिपाही सोनू चौधरी की हत्या कर दी गई थी। सोनू ने अवैध बालू खनन कर ले जा रहे लोगों को पकड़ने की कोशिश की थी। उन्होंने सोनू पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया था। उस समय और भी पुलिसवाले मौजूद थे। इसके बावजूद हत्यारोपियों की पहचान नहीं हो पाई। जिस रास्ते पर हत्या हुई, यहां पहले से रेत लदे ट्रक और ट्रैक्टर ट्रॉलियां चलती हैं। इसके बावजूद पुलिस को खबर नहीं कि सिपाही की हत्या किसने की ?
3 of 6
घटनास्थल पर मुआयना करते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
पांच टीमें और दो आईपीएस लगे... नतीजा सिफर
हत्यारोपियों का पता कर उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पांच टीमें लगी हैं। इनका नेतृत्व दो आईपीएस अधिकारी कर रहे हैं एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद और एसपी पश्चिम रवि कुमार। इसके बावजूद पुलिस यह मालूम नहीं कर पाई कि सिपाही की हत्या किसने की ? घटना से ठीक पहले से वीडियो भी पुलिस को मिले हैं। गांव के लोगों ने भी कई जानकारी दी हैं। सर्विलांस की टीम और क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया है। इन सबके बावजूद नतीजा सिफर है।
4 of 6
सिपाही हत्याकांड: पुलिस ने कब्जे में लिया ट्रैक्टर-ट्रॉली
- फोटो : अमर उजाला
खेरागढ़ में खाकी पर यह पहला हमला नहीं है। पिछले साल चार नवंबर को दरोगा निशामक त्यागी को गोली मारी थी। घटना सदपुरा पीपल में हुई थी। जैसे सोनू चौधरी ने रेत लदी ट्रैक्टर -ट्रॉली को रोकने की कोशिश की, वैसे ही निशामक ने किया था। ट्रैक्टर ट्रॉली रुकते ही रेत लेकर जा रहे लोगों ने उन्हें गोली मार दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया कि अवैध खनन करने वाले लोग पकड़े जाएं।
5 of 6
घटनास्थल पर पुलिस और ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
दरोगा निशामक त्यागी को गोली मारने के मामले में भी पूरा गिरोह नहीं पकड़ा जा सका था। सिर्फ वे लोग पकड़े गए जो खनन कर रेत ले जा रहे थे, खनन कराने वालों को पुलिस ने आरोपी ही नहीं बनाया। पिछले साल खेरागढ़ में ही 18 अक्तूबर में दो सिपाहियों पर हमला हुआ था। इससे पहले छह जून को सिपाही संजीव को गोली मारी गई।