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Agra Hospital Fire: एसी की डक्ट से निकलती आग, चीख-पुकार का शोर, तीन मौतों से पहले का खौफनाक मंजर
Thu, 06 Oct 2022 03:05 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 06 Oct 2022 03:05 PM IST
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आर मधुराज अस्पताल में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के आर मधुराज हॉस्पिटल में जब आग लगी तो खौफनाक मंजर दिखाई दिया। अस्पताल संचालक के पिता को शटर खुलने की आवाज सुनाई देती है। वे जागकर जब पहुंचे तो एसी की डक्ट से आग निकल रही थी। शटर खुलते ही मची चीख-पुकार ने दिल दहला दिया। अंदर की ओर आग और धुंआ के गुब्बार भरा था। हर कोई सहमा हुआ था, आग इतनी भीषण थी कि कोई अस्पताल के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। डायरेक्टर राजन बाहर आ गए, लेकिन जैसे ही पता चला कि दोनों बच्चे अंदर हैं, तो वे फिर से अंदर चले गए, लेकिन इसके बाद वे लौटकर नहीं आ सके। डायरेक्टर राजन, उनकी बेटी सिमरन उर्फ शालू और बेटे ऋषि की मौत हो गई। आंखों में आंसू, लड़खड़ाती जुबान, दर्द ऐसा कि बयां करना मुश्किल हो रहा था। बेटे राजन, पौत्री सिमरन उर्फ शालू और पौत्र ऋषि की मौत से बुजुर्ग गोपीचंद का कलेजा ही फट गया। रो-रोकर उनका बुरा हाल है।
आर मधुराज अस्पताल में लगी थी आग
- फोटो : अमर उजाला
मरीजों को किया शिफ्ट
अस्पताल में चार मरीज भर्ती थे। उनके साथ छह तीमारदार भी थे। कर्मचारियों में चार लोग थे। आग लगने पर सभी बाहर निकल आए। इसके बाद सभी को शिफ्ट कर दिया गया। तीमारदार यही कह रहे थे कि अस्पताल में आग पहुंच जाती तो जान बच पाना मुश्किल हो जाता।
अस्पताल संचालक के पिता गोपीचंद
- फोटो : अमर उजाला
लोगों के गुस्से को देख पहुंची फोर्स
तीन शव देखकर लोग गुस्से में आ गए थे। बाजार बंद हो गया था। हर कोई गम में डूबा हुआ था। लोगों ने बल्ली लगाकर एक तरफ का रास्ता रोक दिया। सूचना पर एसपी सिटी फोर्स के साथ पहुंच गए। उन्होंने लोगों को समझाया। कहा कि पुलिस परिवार के साथ है। अगर, किसी ने आग लगाई है तो जांच होगी। इसके बाद ही लोग माने। शाम को भी अंतिम संस्कार के समय फोर्स तैनात रही।
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शव ले जाने के दौरान उमड़ी लोगों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
दहशत के वो पल
सुबह 4:45 बजे : अस्पताल संचालक के पिता गोपीचंद जागते हैं। उन्हें दुकान का शटर खुलने की आवाज सुनाई देती है।सुबह 4:50 बजे : गोपीचंद को दुकान में बनी एसी की डक्ट में आग निकलती दिखाई दी। वह बाहर आकर दुकान का शटर उठाते हैं। शोर मचाने लगते हैं।
सुबह 4:55 बजे : राजन, लवी और उनके बहनोई बाहर निकल आते हैं।
सुबह 5:00 बजे : नर्स स्नेहा बाहर आती है। वह मेडिकल स्टोर संचालक प्रिंस के साथ मरीज और तीमारदारों को बाहर निकालती है।
सुबह 5:05 बजे : राजन की पत्नी राजरानी अस्पताल की सीढ़ियों से बाहर आ जाती हैं।
सुबह 5:10 बजे : राजन बच्चों के फंसे होने के बारे में पता चलने पर दोबारा अंदर चले गए।
सुबह 5:17 बजे : अग्निशमन विभाग को फोन पर सूचना मिलती है।
सुबह 5:20 बजे : राजन के बाहर नहीं निकलने पर पिता लोगों के साथ अंदर जाते हैं।
सुबह 5:30 बजे : राजन और सिमरन को लोग बाहर निकालकर लाए, उन्हें अस्पताल भेजा गया।
सुबह 5:32 बजे : दमकल पहुंच जाती है, थाना शाहगंज पुलिस भी मौके पर पहुंची।
सुबह 5:35 बजे : ऋषि को बाहर निकालकर लाते हैं, उसे अस्पताल पहुंचाया।
सुबह 6:05 बजे : चिकित्सकों ने राजन, ऋषि और सिमरन को मृत घोषित कर दिया।
सुबह 6:40 बजे : एसएसपी प्रभाकर चौधरी पहुंच जाते हैं।
सुबह 8:25 बजे : आईजी नचिकता झा पहुंचते हैं, वह मौका मुआयना करते हैं।
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विलाप करते परिवार के लोग
- फोटो : अमर उजाला
पहले जा चुकी है जान
- शहर में पहले भी बड़े अग्निकांड हो चुके हैं। बड़ी घटना जीवनी मंडी, छत्ता में हुई थी। मई 2002 में श्रीजी इंटरनेशनल शू फैक्टरी में भीषण आग लगी थी। 44 मजदूरों की जान चली गई थी।- 13 अक्तूबर 2012 की रात सेवला जाट में घर में आग लगी थी। परिवार के 10 लोग जिंदा जल गए थे। व्यापारी का परिवार था। घर में सामान रखा हुआ था।
- 21 मई 2022 को बालूगंज में वरिष्ठ अधिवक्ता गया प्रसाद के घर में बैटरी में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। उनके बेटे डॉ. आशीष दीक्षित की जान चली गई थी। आशीष की पत्नी, बेटी और बेटा भी फंस गए थे। उन्हें बाथरूम से बाहर निकाला गया था।
- अक्तूबर 2017 में सिकंदरा के रुनकता में एक घर में आतिशबाजी में आग लग गई थी। इससे दो बहनों की मौत हो गई थी।