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Hospital Fire: बेसमेंट में चल रहा था 10 बेड का पंजीकृत अस्पताल, एडीए से नक्शा पास, नगर निगम ले रहा था शुल्क

अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 06 Oct 2022 02:18 PM IST
अस्पताल के बाहर खड़े लोग
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आगरा के आर मधुराज हॉस्पिटल में आग लगने की घटना में डायरेक्टर राजन, उनकी बेटी सिमरन उर्फ शालू और बेटे ऋषि की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। आर मधुराज हॉस्पिटल बेसमेंट में संचालित था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के यहां 10 बेड का अस्पताल पंजीकृत है। वार्ड के साथ आईसीयू भी संचालित था। 

आर मधुराज अस्पताल में सभी तरह के ऑपरेशन, हृदय रोग, डायबिटीज, सांस रोग, टीबी, बाल रोग, गुर्दे की पथरी, हर्निया, अपेंडिक्स, भगदंर, बवासीर, स्त्री व प्रसूति रोगों, बच्चेदानी के इलाज, रसौली व अंडाशय की गांठ के इलाज किया जा रहा था। जोड़ों के प्रत्यारोपण व फ्रेक्चर को जोड़ने आदि की सुविधाएं भी दी गई थीं।  मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल उनके यहां डॉ. ईशू शर्मा के नाम से पंजीकृत है। प्रेक्टिस करने वालों में पांच डॉक्टरों का भी पंजीकरण है।
आर मधुराज अस्पताल
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बेसमेंट में संचालित होने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। 50 से कम बेड वाले अस्पतालों की एनओसी भी नहीं देखी जाती है। 
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आगरा विकास प्राधिकरण
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वहीं आर मधुराज हॉस्पिटल का नक्शा एडीए की ओर से पास है। अस्पताल की ओर से नगर निगम को लाइसेंस शुल्क भी दिया गया है।    
अस्पताल संचालक राजन के पिता गोपीचंद
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बेसमेंट में चल रहे अस्पतालों पर निर्णय लिया जाना है

मुख्य चिकित्साधिकारी का कहना है कि अस्पताल में चल रहे अस्पतालों पर निर्णय लिया जाना है। जिलाधिकारी से अनुरोध करके एडीए व नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। वर्ष 2011 में अस्पतालों के संचालन के संबंध में नियम बनाया गया था, उसको लागू कराया जाएगा। बेसमेंट अस्पताल चलाने के लिए नक्शा नहीं पास होना चाहिए। 
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आग लगने की घटना के बाद जांच करती टीम
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पहले जा चुकी है जान

- शहर में पहले भी बड़े अग्निकांड हो चुके हैं। बड़ी घटना जीवनी मंडी, छत्ता में हुई थी। मई 2002 में श्रीजी इंटरनेशनल शू फैक्टरी में भीषण आग लगी थी। 44 मजदूरों की जान चली गई थी।
- 13 अक्तूबर 2012 की रात सेवला जाट में घर में आग लगी थी। परिवार के 10 लोग जिंदा जल गए थे। व्यापारी का परिवार था। घर में सामान रखा हुआ था।
- 21 मई 2022 को बालूगंज में वरिष्ठ अधिवक्ता गया प्रसाद के घर में बैटरी में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। उनके बेटे डॉ. आशीष दीक्षित की जान चली गई थी। आशीष की पत्नी, बेटी और बेटा भी फंस गए थे। उन्हें बाथरूम से बाहर निकाला गया था।
- अक्तूबर 2017 में सिकंदरा के रुनकता में एक घर में आतिशबाजी में आग लग गई थी। इससे दो बहनों की मौत हो गई थी।
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