अथाह सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए चंद्रवाड़ पर शासन की नजर जम गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अपर महानिदेशक ने साइट का सर्वे किया। यमुना नदी के किनारे बसे चंद्रवाड़ की एतिहासिक धरोहर को सहेजने की कवायद शुरू हो रही है। फिरोजाबाद से 7 किमी दूर चंद्रवाड़ को हेरिटेज साइट में बदलने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम सर्वे करने आ चुकी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक की अध्यक्षता में टीम यहां टीले और इमारतों को संरक्षित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने चंद्रवाड़ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए योजना बनाना शुरू कर दिया है। पर्यटन मंत्री ने चंद्रवाड़ को बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने का दावा किया है। आगरा में फतेहाबाद से सटे चंद्रवाड़ का इतिहास 10वीं सदी का है। मान्यता है कि विक्रम संवत 1052 में राजा चंद्रसेन के नाम पर यह चंदवार और चंदावर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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जैन प्रतिमाएं
- फोटो : अमर उजाला
चौहान वंशीय राजपूतों ने जैन धर्म अपना लिया, जिसके बाद यहां जैन कलाकृतियों और साहित्य का सृजन हुआ। यहां के टीलों से 10वीं और 11वीं सदी की जैन प्रतिमाएं निकलती रही हैं।
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जैन प्रतिमाएं
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भगवान चंद्रप्रभु की स्फटिक मणि की पद्मासन की प्रतिमा भी यहां यमुना नदी से मिली। 1194 में राजा जयचंद और मोहम्मद गोरी के बीच चंदावर का युद्ध हुआ, जिसमें राजा जयचंद की मृत्यु हुई थी।
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चंद्रवाड़
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साइट के बारे में तथ्य जुटाए जा रहे
अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. राजकुमार पटेल ने बताया कि चंद्रवाड़ को हेरिटेज साइट बनाने के प्रस्ताव पर दिल्ली से पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का दल आ चुका है। साइट के बारे में तथ्य जुटाए जा रहे हैं। इसके लिए मुख्यालय से ही कोई फैसला लिया जाएगा।
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चंद्रवाड़
- फोटो : अमर उजाला
वित्तीय स्वीकृति दिलाई जाएगी
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'हमारी सरकार ने चंद्रवाड़ को तीर्थ नगरी बनाने और इसके पर्यटन विकास के लिए योजनाओं को तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। एस्टिमेट तैयार होते ही वित्तीय स्वीकृति दिलाई जाएगी।'