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कब्जे का संकट: जहां बनना है शिक्षा संकुल, वहां पड़ीं हैं झोपड़पट्टी; इसलिए अटका है ध्वस्तीकरण
Sat, 19 Sep 2026 09:47 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 19 Sep 2026 09:47 AM IST
सार
पंचकुइयां में 16.09 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला शिक्षा संकुल जमीन खाली न होने के कारण छह महीने से अटका है। परियोजना की पहली किस्त के तीन करोड़ रुपये मार्च में जारी हो चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
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पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के पंचकुइयां स्थित पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय की जमीन पर प्रस्तावित शिक्षा संकुल का निर्माण जमीन के कब्जे के कारण अटक गया है। करीब तीन एकड़ जमीन पर वर्षों से झोपड़पट्टी बसी होने के कारण साइट अब तक निर्माण के लिए खाली नहीं हो सकी है।
शासन से परियोजना के लिए तीन करोड़ रुपये की पहली किस्त मार्च में जारी हो चुकी है, लेकिन सितंबर तक मौके पर निर्माण शुरू नहीं हुआ है। यहां तक कि पुरानी बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण भी नहीं हो सका है। परियोजना को 2027-28 तक बनकर तैयार किया जाना है, ऐसे में जमीन उपलब्ध न होने से तय समयसीमा में काम पूरा करना चुनौती बन गया है।
16 करोड़ 9 लाख 19 हजार रुपये की लागत से दो मंजिला शिक्षा संकुल भवन बनाया जाना है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन को सौंपी है। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। भवन तैयार होने के बाद शिक्षा विभाग के कई महत्वपूर्ण मंडलीय और जिला स्तरीय कार्यालय एक ही परिसर में संचालित किए जाएंगे।
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प्रस्तावित भवन में संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी), डीआईओएस, डीआर कार्यालय, संस्कृत पाठशाला, रमसा, डीआईओएस-2, वित्त एवं लेखाधिकारी मंडल व जिले के कार्यालयों को जगह दी जानी है। नक्शे के अनुसार 3.24 एकड़ में जिस जगह पर कब्जा है वहीं, 2 मंजिला शिक्षा संकुल बनकर तैयार होना है और जिस जगह जर्जर इमारत खड़ी है उसका ध्वस्तीकरण कर पार्किंग बनाई जाएगी।
2027-28 तक तैयार होना है भवन
शिक्षा विभाग के मुताबिक शिक्षा संकुल को 2027-28 तक बनकर तैयार किया जाना है। परियोजना पर विभाग का बजट लग चुका है और पहली किस्त भी जारी हो गई है, लेकिन जमीन उपलब्ध न होने के कारण निर्माण की शुरुआत ही नहीं हो पाई है। यदि जल्द कब्जा नहीं हटाया गया तो निर्माण की तय समयसीमा में काम पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
समन्वय अधिकारी ( माध्यमिक) डब्लूएन मिडिल ने बताया कि दो बार आगे की कार्रवाई के लिए प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं। साथ ही जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूर्ण कर ली गई है। सदर एसडीएम विक्रम रावत ने बताया कि वहां रह रहे लोगों से लगातार बातचीत की जा रही है। डीआईओएस के साथ समन्वय कर जमीन का सीमांकन कर लिया गया है। इसके बाद लोगों को समझाकर नियमानुसार विस्थापन की कार्रवाई की जाएगी।
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शासन से परियोजना के लिए तीन करोड़ रुपये की पहली किस्त मार्च में जारी हो चुकी है, लेकिन सितंबर तक मौके पर निर्माण शुरू नहीं हुआ है। यहां तक कि पुरानी बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण भी नहीं हो सका है। परियोजना को 2027-28 तक बनकर तैयार किया जाना है, ऐसे में जमीन उपलब्ध न होने से तय समयसीमा में काम पूरा करना चुनौती बन गया है।
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16 करोड़ 9 लाख 19 हजार रुपये की लागत से दो मंजिला शिक्षा संकुल भवन बनाया जाना है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन को सौंपी है। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। भवन तैयार होने के बाद शिक्षा विभाग के कई महत्वपूर्ण मंडलीय और जिला स्तरीय कार्यालय एक ही परिसर में संचालित किए जाएंगे।
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प्रस्तावित भवन में संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी), डीआईओएस, डीआर कार्यालय, संस्कृत पाठशाला, रमसा, डीआईओएस-2, वित्त एवं लेखाधिकारी मंडल व जिले के कार्यालयों को जगह दी जानी है। नक्शे के अनुसार 3.24 एकड़ में जिस जगह पर कब्जा है वहीं, 2 मंजिला शिक्षा संकुल बनकर तैयार होना है और जिस जगह जर्जर इमारत खड़ी है उसका ध्वस्तीकरण कर पार्किंग बनाई जाएगी।
2027-28 तक तैयार होना है भवन
शिक्षा विभाग के मुताबिक शिक्षा संकुल को 2027-28 तक बनकर तैयार किया जाना है। परियोजना पर विभाग का बजट लग चुका है और पहली किस्त भी जारी हो गई है, लेकिन जमीन उपलब्ध न होने के कारण निर्माण की शुरुआत ही नहीं हो पाई है। यदि जल्द कब्जा नहीं हटाया गया तो निर्माण की तय समयसीमा में काम पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
समन्वय अधिकारी ( माध्यमिक) डब्लूएन मिडिल ने बताया कि दो बार आगे की कार्रवाई के लिए प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं। साथ ही जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूर्ण कर ली गई है। सदर एसडीएम विक्रम रावत ने बताया कि वहां रह रहे लोगों से लगातार बातचीत की जा रही है। डीआईओएस के साथ समन्वय कर जमीन का सीमांकन कर लिया गया है। इसके बाद लोगों को समझाकर नियमानुसार विस्थापन की कार्रवाई की जाएगी।