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घर में वो गीता-कुरान रखता है, जुबां पर राधे-राधे नाम रखता है
धर्मेंद्र त्यागी/अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 19 May 2017 06:59 PM IST
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अब्दुल गफ्फार
- फोटो : अमर उजाला
घर में वो गीता, कुरान रखता है, जुबां पर राधे-राधे नाम रखता है
अब्दुल गफ्फार
- फोटो : अमर उजाला
43 साल के गफ्फार का ताल्लुकात भले ही उनका इस्लाम से है, लेकिन सांवरे से प्रीत की डोर ऐसी बंधी कि मुख से श्रीराधे-श्रीराधे ही निकलता। अब्दुल गफ्फार वक्त मिलते ही श्रीमद् भागवत कथा, गीता, रामचरित मानस का पाठ करते हैं। उन्होंने इस्लाम से नाता नहीं तोड़ा है, वो पांचों वक्त के नमाजी हैं।
अब्दुल गफ्फार
- फोटो : अमर उजाला
गफ्फार कहते हैं कि सात साल पहले मथुरा में एक हिंदू मित्र की शादी में गए थे। वहां दोस्तों ने बांकेबिहारी के दर्शन की बात कही। बोले, वह भी चलेंगे। खुशकिस्मत देखिए, दोस्त सभी बारात के साथ लौट लिए, लेकिन वो नहीं आए। सोच लिया, दर्शन करके ही जाऊंगा। दोपहर मंदिर पहुंचे तो पट बंद थे, पुजारी से पता चला कि शाम के साढे़ चार बजे दर्शन होंगे।
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अब्दुल गफ्फार
- फोटो : अमर उजाला
इस पर वे मंदिर के बाहर ही बैठ गए। पट खुले और कान्हा की सांवरी मूरत के दर्शन किए। बोले, जैसे ही कान्हा के दर्शन हुए उनकी मूरत मन में बस गई। हृदय में एक ज्योति से जलने लगी। घर लौटा तो रात-दिन कान्हा की मूरत मनमस्तिष्क में आने लगी। फिर क्या, हिंदू धर्म, ग्रंथ और कान्हा को समझने की जिज्ञासा बढ़ी और अब पूरी तरह से सांवरे से डोर बंध गई है।
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अब्दुल गफ्फार
- फोटो : अमर उजाला
गफ्फार का हर साल गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने जाते हैं। अभी तक छह बार ऐसा कर चुके हैं। 84 कोस की परिक्रमा भी वे तीन बार कर चुके हैं। कहते हैं कि भी हिंदू मित्रमंडली के साथ तो कभी अकेले ही मथुरा के लिए रवाना हो जाते हैं। आसपास भागवत होने पर वो सुनने का मौका नहीं छोड़ते।