Bhagwad Geeta Quotes For Kids: 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। भगवत गीता का ज्ञान लगभग 5560 वर्ष पहले प्रसारित किया गया था। भगवद गीता उपनिषदों और ब्रह्मसूत्रों में समाहित है, जो हिंदू धर्म की परंपरा में उपनिषदों और धर्मसूत्रों के समान ही स्थान रखते हैं।
वास्तव में श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा रहस्यमय ग्रंथ है जिसकी महत्ता को कोई भी शब्दों में बयान करने में सक्षम नहीं है। वहां संपूर्ण वेदों का सार संग्रहित है। संस्कृत भाषा इतनी सुंदर और सरल है कि आप इसे थोड़े से अभ्यास से आसानी से समझ सकते हैं। भगवान ने श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में ऐसा अद्भुत ग्रंथ लिखा है जिसका एक भी शब्द सद्उपदेश से रहित नहीं है।
आज बच्चे फोन के गुलाम बनते जा रहे हैं। इस कारण उनमें मूल्यों की कमी है। ऐसे में उनके परिवार वालों को उन्हें गीता के ये श्लोक पढ़ाना और समझाना चाहिए। ये श्लोक उनके जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देंगे।
यह भी पढ़ें- आज का राशिफल और वार्षिक राशिफल 2025
वार्षिक राशिफल 2025
2 of 5
गीता ज्ञान
- फोटो : Adobe Stock
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
बच्चों की आदत होती है कि वे किसी भी काम के नतीजे का इंतज़ार करते हैं। ऐसे में यह श्लोक उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। इस श्लोक का अर्थ यह है कि आप केवल अपने कर्मों के हकदार हैं, कर्मों के फल के नहीं। इसलिए कर्म करते रहो फल स्वतः hi तुम्हे प्राप्त होगा।
3 of 5
गीता ज्ञान
- फोटो : एएनआई (फाइल)
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
जैसे-जैसे लोग चीज़ों के बारे में सोचते हैं, उनमें उनके प्रति लगाव विकसित हो जाता है। इससे उनमें इच्छा पैदा होती है और उस इच्छा का इंतज़ार करने से क्रोध पैदा होता है। इसलिए कोशिश करें कि किसी भी चीज से ना जुड़ें और पूरी तरह से अपने काम में लीन रहें। बच्चे जब कुछ देखते हैं तो तुरंत जिद पर आ जाते हैं और कुछ समझ नहीं आने पर क्रोधित हो जाते हैं। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए यह श्लोक बिल्कुल उपयुक्त है।
4 of 5
गीता ज्ञान
- फोटो : istock
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
क्रोध से मनुष्य का हृदय या बुद्धि नष्ट होती है । जब तर्क खो जाता है, तो व्यक्ति स्वयं को नष्ट कर लेता है। कई बच्चे छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित हो जाते हैं। ऐसे में यह श्लोक उन्हें एहसास कराता है कि गुस्सा कितना हानिकारक है।
5 of 5
गीता ज्ञान
- फोटो : freepik
श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय:।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥
जो लोग अपनी इंद्रियों पर विश्वास और नियंत्रण रखते हैं, वे अपनी इच्छा से ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं और ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे जल्द ही शांति प्राप्त कर लेते हैं। यह श्लोक बच्चों के सीखने के लिए बहुत उपयोगी है। यह उन्हें एकाग्रचित होकर अपने लक्ष्य की ओर ध्यान लगाने के लिए प्रेरित करता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।