गजब! नीचे गौशाला ऊपरी मंजिल पर पाठशाला
सरकारी दावों के विपरीत बच्चों का भविष्य तंगहाली में तराशा जा रहा है। यहां निचली मंजिल में मवेशी बांधे गए हैं और ऊपरी मंजिल में सरकारी स्कूल। इनपुट और फोटो: राकेश शर्मा, रंजीत शर्मा
गजब! नीचे गौशाला ऊपरी मंजिल पर पाठशाला
ऐसा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र भरमौर के सरकारी स्कूल सिंयूर में हो रहा है। यहां गौशाला में स्कूल चलाया जा रहा है। यह व्यवस्था वर्ष 2006 से चल रही है। पाठशाला दसवीं तक है। नौवीं और दसवीं के सौ बच्चे यहां अध्ययनरत हैं। सिंयूर विद्यालय का दर्जा वर्ष 2006 में बढ़ाया गया था। इसके बाद स्कूल भवन बनाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं हो पाई है। स्थानीय व्यक्ति ने स्कूल भवन के लिए अपनी जमीन दान में देने की पेशकश की थी और विभाग ने इसपर अमल करते हुए इमारत का काम भी शुरू कर दिया, लेकिन इस काम को कुछ दिन बाद बंद कर दिया गया।
गजब! नीचे गौशाला ऊपरी मंजिल पर पाठशाला
उधर, गौशाला का मालिक कई बार शिक्षा विभाग को स्कूल खाली करने का नोटिस दे चुका है, लेकिन अभी तक न तो स्कूल के लिए इमारत बन पाई और न ही गौशाला को खाली किया गया। दान की जमीन पर अब तक विभाग करीब 30 लाख रुपये जमीन समतल करने और यहां इमारत की नींव भरने में खर्च कर चुका है। अब इस जगह को भूस्खलन जोन में गिना जा रहा है। यही तर्क देकर स्कूल की इमारत को यहां न बनाने की सलाह दी जा रही है।
गजब! नीचे गौशाला ऊपरी मंजिल पर पाठशाला
एसडीएम भरमौर जितेंद्र कंवर का कहना है कि प्रशासन मामले की जांच करेगा। बच्चों का गौशाला में बैठना उचित नहीं है। बच्चों के लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे और जल्द से जल्द भवन निर्माण का प्रयास किया जाएगा।
गजब! नीचे गौशाला ऊपरी मंजिल पर पाठशाला
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता स्वरूप धीमान का कहना है कि विभाग के पास भवन बनाने के लिए बजट है। लेकिन, अब तक जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। जिसकी वजह से भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है।