लेसा को मात्र सात करोड़ रुपये का भुगतान न किए जाने से शारदानगर विस्तार में प्रधानमंत्री आवास के 2256 आवंटी पीएम नरेंद्र मोदी से अपने आशियाने की चाभी पाने से चूक गए। ऐसा एलडीए की लापरवाही से हुआ, जहां लेसा को भुगतान कर बिजली आपूर्ति लेने के लिए फाइल करीब छह माह से घूम ही रही है।
अक्तूबर में हुए अर्बन कॉन्क्लेव के समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे। कार्यक्रम में राजधानी से प्रधानमंत्री आवास के कुछ आवंटियों को सांकेतिक रूप से चाभी देने की योजना बनी।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर आवास बंधु ने एलडीए से सूची भी मांगी, लेकिन अंतिम समय में विकास कार्य पूरे नहीं होने का तर्क देकर कब्जा देने से मना कर दिया गया। अब सामने आया है कि सात करोड़ रुपये के भुगतान को अनुमति न मिलने से ऐसा हुआ।
अधिशासी अभियंता विद्युत व यांत्रिक बीपी सिंह का कहना है कि 33 केवी लाइन से उपकेंद्र बनाने के लिए यह रकम लेसा को दी जानी है। हालांकि, जीएसटी को लेकर तकनीकी दिक्कत से भुगतान की अनुमति नहीं मिली। कार्यवाही चालू है, कोशिश है कि जल्द रकम देकर काम शुरू करा लिया जाए।
बिजली के चक्कर में सिविल वर्क धीमा
योजना में चार मंजिला बिल्डिंग बनकर तैयार है। ज्यादातर एरिया में सड़क बन चुकी है और पार्क भी तैयार हैं। हालांकि, बिजली आपूर्ति में देरी से सिविल वर्क धीमा हो गया है। मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह का कहना है कि बिजली मिलना सुनिश्चित हो तो एक सप्ताह में कब्जा देना शुरू किया जा सकता है।
भुगतान के बाद भी लग जाएंगे छह महीने
पीएम आवास पर कब्जा देने में एलडीए छह महीने की देरी कर चुका है। अब लेसा को तुरंत भुगतान हो जाए तो भी उपकेंद्र बनने और कनेक्शन देना शुरू करने में छह माह से अधिक का समय लग जाएगा। लेसा के एक अधिकारी ने बताया कि एलडीए ने कुल भुगतान का 15 प्रतिशत सुपरविजन चार्ज भी नहीं दिया है। ऐसे में टीम यहां विजिट नहीं कर सकी है।
यह चार्ज जमा होने के बाद उपकेंद्र के लिए जरूरी सामान की सूची फाइनल करने में डेढ़ माह लग जाएंगे। ऐसे में संभावना है कि चुनाव के बाद ही प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा मिल पाए। उधर, बसंतकुंज में पहले ही निर्माण पूरा करने में देरी हो चुकी है।