लखनऊ के गुडंबा निवासी ई-रिक्शा मालिक पिंटू गुप्ता ने बच्चों, पत्नी की हत्या करने के बाद खुद भी जान दे दी। शनिवार सुबह जब परिवारीजनों व आस-पास के लोगों को इसकी खबर लगी तो एकबारगी उन्हें यकीन नहीं हुआ। इस बीच चर्चा रही कि बढ़ते कर्ज और आर्थिक तंगी ने पिंटू को इतना तोड़ दिया कि उसने यह कदम उठा लिया। लोगों का कहना था कि पिंटू की कमाई कम और खर्च ज्यादा थे। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पिंटू ने उनका लखनऊ पब्लिक स्कूल जैसे अच्छे संस्थान में दाखिला कराया। उन्हें खुश देखने को दिन-रात मेहनत करता था। वह रिटायर्ड अधिकारी की गाड़ी चलाता था। जिंदगी की गाड़ी सरपट दौड़े, इसके लिए उसने एक साल पहले दो ई-रिक्शा लोन पर लिए। इसका करीब 4 लाख रुपये का कर्ज उसके सिर पर था। वह कुछ कर्ज समय से चुकाता तो भी कई बाकी रह जाते। उसके खर्चे भी पूरे नहीं हो रहे थे।
पत्नी व बच्चों को मौत के घाट उतारा, फिर खुद लगा ली फांसी, शव देख नम हुईं पुलिसकर्मियों की आंखें
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बच्चों के साथ की मस्ती ...और फिर मार डाला
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि पिंटू बच्चों से लगाव रखता था। उनकी खुशी के लिए शुक्रवार रात सौतेले पिता हरिशंकर व मां को खाने पर बुलाया। देर रात तक बच्चों के साथ मस्ती की और क्रिकेट मैच देखा। पिता के जाने के बाद बच्चों को सुला दिया। पुलिस के मुताबिक पड़ोसी बताते हैं कि पति-पत्नी में किसी बात पर कहासुनी हुई। इसके बाद किसी ने आवाज नहीं सुनी। बच्चों के सोने के बाद पिंटू ने सबसे पहले पत्नी के मुंह पर तकिया लगाकर उसे मौत के घाट उतारा। इसके बाद बेटी नेहा और बेटा नैतिक को भी ऐसे ही मार डाला। फिर उसने फांसी लगा ली।
खिड़की से देखने पर पता चला मामला
छोटे लाल के मकान में आशुतोष तिवारी और शनि भी किराये पर रहते हैं। जब वह पिंटू को बुलाने गए तो दूसरी मंजिल की बालकनी से आशुतोष की बेटी देख रही थी। छोटे लाल ने उससे पिंटू को बुलाने को कहा। उसने दरवाजे पर दस्तक दी, पर वह नहीं खुला और न अंदर से कोई जवाब आया। इस पर आशुतोष से पता करने को कहा। किसी तरह आशुतोष ने बालकनी में उतरकर खिड़की से झांका तो देखा अंदर पिंटू का शव लटक रहा था।
शव देखकर बेहोश हुई मां
पुलिस के मुताबिक पिंटू के पिता नहीं है। उसकी मां बेबी शिवानी बिहार में हरिशंकर नाम के व्यक्ति के साथ बतौर पत्नी 12 साल से रह रही है। दोनों के घर आना-जाना है। सौतेले पिता हरिशंकर के मुताबिक शनिवार सुबह 10 बजे उनके पड़ोस में रहने वाली सोनी ने मोबाइल पर सूचना दी कि पिंटू का दरवाजा नहीं खुल रहा है। सोनी छोटे लाल राजवंशी की नौकरानी है। इस पर हरिशंकर पत्नी के साथ पिंटू के घर पहुंचे। वहां दरवाजा खटखटाया और कई बार मोबाइल पर कॉल की, लेकिन नंबर नहीं लगा। अनहोनी की आशंका से पिंटू की मां चीखने लगी। इसके बाद पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो सामने पिंटू पंखे के कुंडे से लटकता मिला। मां बेटे का शव देख बेहोश हो गई।
मालिक से भी पैसा उधार लिया था
छोटे लाल के मुताबिक दो दिन पहले पिंटू ने उनसे 2500 रुपये उधार लिए थे। शनिवार को रकम लौटाने का वादा भी किया था। मकान मालिक के मुताबिक अकसर पिंटू उनसे उधार लेता रहता था।
खाने का नमूना लिया गया: पुलिस की मानें तो पिंटू ने शुक्रवार को ही तीनों की हत्या व खुदकुशी की योजना बना ली थी। आशंका है कि उसने बच्चों व पत्नी के खाने में बेहोशी की दवा मिला दी थी, ताकि हत्या के दौरान कोई चीख न सके। पुलिस ने किचन में रखे रात के खाने का नमूना फॉरेंसिक जांच को भेज दिया है।
पुणे में रहते हैं दो भाई: हरिशंकर के मुताबिक पिंटू के दो भाई किशन व विक्की है। दोनों मामा के साथ पुणे गए और निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। हरिशंकर के मुताबिक दोनों मुस्लिम धर्म स्वीकार कर चुके हैं। उनका घर पर आना-जाना कम है। फोन पर ही बातचीत होती है।
कॉलोनी में मच गई अफरा-तफरी: परिवार के चार लोगों की मौत की सूचना कॉलोनी में फैल गई। देखते-देखते वहां सैकड़ाें लोग जुट गए। सबकी जुबान पर एक ही चर्चा थी कि आखिर कौन सा कारण था कि पिंटू ने अपना परिवार खत्म कर लिया।
मौत के डर के चलते बांधा काला कपड़ा: तीनों को मौत के घाट उतारने के बाद पिंटू ने फांसी लगा ली। ऐसे में सामने देखकर वह इरादा न बदल दे तो इसके लिए उसने मुंह पर काला कपड़ा डाल लिया था।