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प्लाईवुड फैक्ट्री में भीषण आग, मच गई भगदड़, कई लोगों ने जान बचाने को छत से लगाई छलांग, तस्वीरें

Thu, 20 Feb 2020 06:07 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 20 Feb 2020 06:07 PM IST
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fire broke out in plywood factory in lucknow.
प्लाईवुड फैक्टरी में आग - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ के बाजारखाला में ऐशबाग पानी की टंकी के पास रिहायशी इलाके में स्थित प्लाईवुड फैक्टरी में बुधवार दोपहर आग लग गई। हादसे के वक्त फैक्टरी में काम कर रहे 20 से 25 मजदूरों में चीख-पुकार व भगदड़ मच गई। जान बचाने को कुछ लोगों ने तो छत से छलांग लगा दी। आसपास के इलाके के लोग घर छोड़कर भाग खड़े हुए। लपटों से तीन मजदूर झुलस गए। जबकि दो लापता बताए जा रहे हैं। इनकी तलाश में रात तक अफसर व स्थानीय लोग मलबा खंगालते रहे।


मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि प्लाईवुड फैक्टरी मोतीनगर निवासी धर्मवीर गुलाटी की है। फैक्टरी में 20 से 25 महिला-पुरुष मजदूरी करते हैं। बुधवार को फैक्टरी में बिजली नहीं आ रही थी, जिसके चलते जनरेटर से काम किया जा रहा था। दोपहर करीब डेढ़ बजे लपटों ने फैक्टरी को घेरे में ले लिया। लपटें देखकर चीखते हुए मजदूर बाहर की तरफ भागने लगे। चंद सेकंड में ही लपटों ने विकराल रूप ले लिया। फैक्टरी के भीतरी हिस्से में काम कर रहे कुछ मजदूर आग में फंस गए। धुआं फैलने से आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। लोग घरों से बाहर निकलकर चीख-पुकार मचाने लगे। आग से अपना आशियाना बचाने के लिए लोग बाल्टियां लेकर पानी फेंकते रहे। फैक्टरी के पास रहने वाली 50 वर्षीय उर्मिला ने बताया कि वह छत पर बैठी थीं तभी आग लग गई। जान बचाने के लिए भागीं तो चोट खा गईं। उर्मिला के अलावा आशा के हाथ और पूनम के पैरों में भी चोटें आई हैं।

fire broke out in plywood factory in lucknow.
प्लाईवुड फैक्टरी में आग - फोटो : अमर उजाला

दीवार तोड़कर मजदूरों को निकाला
अपर पुलिस उपायुक्त पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि फैक्टरी के पीछे ऐशबाग जलकल विभाग का तालाब है। पुलिस ने जलकल विभाग के कर्मचारियों की मदद से फैक्टरी के पीछे की दीवार तोड़कर भीतर फंसे उन्नाव के मौरावां निवासी 30 वर्षीय मजदूर सोनू व मिथिलेश और सीतापुर के बिसवां में रहने वाले वीरेंद्र की जान बचाई। तीनों काफी झुलस गए थे। उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। झुलसे मजदूरों ने करन नाम के अपने साथी के लापता होने की जानकारी दी है। वहीं दूसरा मजदूर कौन है, इस बारे में वह स्पष्ट रूप से नहीं बता सके।
शॉर्ट सर्किट से हादसे की आशंका
फैक्टरी के कर्मचारियों व स्थानीय लोगों ने अग्निकांड में लगभग 50 लाख रुपये कीमत का माल व मशीनें जलने जानकारी दी है। मुख्य अग्निमशन अधिकारी का कहना है कि शुरुआती छानबीन में जनरेटर रूम में हुए शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है।

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आग बुझाते दमकलकर्मी - फोटो : अमर उजाला
पड़ोस के केमिकल गोदाम तक पहुंचीं लपटें
प्लाईवुड फैक्टरी के ठीक बगल में प्रियंका दीक्षित का केमिकल का गोदाम है जहां ड्रमों में हजारों लीटर तेजाब व अन्य ज्वलनशील केमिकल रखा है। लपटें वहां तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। गोदाम के बगल में ही डायग्नोस्टिक सेंटर है। गोदाम के कुछ ड्रम लपटों की चपेट में आकर जल उठे। लव डायग्नोस्टिक सेंटर के शुभम और अभि समेत इलाके के लोगों ने छत पर चढ़कर बाल्टियों से पानी फेंककर आग बुझाने का प्रयास किया।
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लोगों की जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला

केमिकल के धुएं से जलती हैं आंखें 
धर्मवीर गुलाटी की प्लाईवुड फैक्टरी आसपास के लोगों के लिए किसी सजा से कम नहीं थी। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब इलाके के लोगों को फैक्टरी की वजह से कोई समस्या न होती हो।  लोगों ने बताया कि फैक्टरी की मशीनें रात में भी चलती थीं जिसके शोर से लोगों का सोना मुश्किल था। आकाश और अंशू ने बताया कि केमिकल के धुएं से हर वक्त उनकी आंखों से आंसू निकलते रहते हैं।
गुस्साए लोग बोले-कई बार लग चुकी आग, फैक्टरी हटाई नहीं जा रही
आग लगने से स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। उनका कहना था कि पहले भी कई बार फैक्टरी में आग लग चुकी है। इसके बावजूद इसे शिफ्ट नहीं कराया गया। लोगों ने फैक्टरी को हर हाल में बंद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया।

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छत से कूदते लोग - फोटो : अमर उजाला
आग से बचाव के लिए नहीं थे कोई इंतजाम 
प्लाईवुड फैक्टरी में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे। लोगों ने बताया कि धर्मवीर गुलाटी पहले आरा मशीन चलाते थे। वर्ष 2000 से उन्होंने प्लाईवुड फैक्टरी पर काम शुरू करते हुए वर्ष 2012 में लाइसेंस हासिल किया और मशीनें व अन्य संसाधन जुटाने के बाद वर्ष 2005 से फैक्टरी चालू की। यहां आग से बचाव के लिए एक भी इंतजाम नहीं था।
9 दमकल ने 3 घंटे में पाया लपटों पर काबू
करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद शाम पांच बजे लपटों पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। हालांकि, फैक्टरी में पड़ी सैकड़ों टन लकड़ी, बुरादा और तैयार प्लाईवुड का मलबा सुलगता रहा। देर रात तक अग्निशमन विभाग की टीम मलबा हटवाकर पानी फेंक रही थी।
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