बहराइच में बीते दिनों एक मासूम को सिर्फ इसलिए जान गंवानी पड़ी कि उसके मां-बाप के पास अस्पताल के कर्मचारियों को देने के लिए घूस के पैसे नहीं थे। मीडिया में आने के बाद इस मामले पर शासन, प्रशासन और मानवायोग ने एक्शन लेना शुरू किया है।
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बहराइच में बच्चे की मौत
- फोटो : amar ujala
इलाज में देरी के कारण हुई 10 महीने के बच्चे की मौत को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान में लिया है। आयोग ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को नोटिस भेजकर इस मामले की चार हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहराइच जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ओपी पांडेय को हटाने के निर्देश दिए हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक गरीब परिवार बुखार से पीड़ित 10 महीने के बच्चे को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गया। परिवारीजनों का आरोप है कि उससे नर्स से लेकर स्वीपर तक सभी ने पैसे मांगे। पीड़ित पक्ष ने बताया, स्वीपर ने 20 तो नर्स ने 500 रुपये मांगे थे।परिवारीजनों का आरोप है कि सुबह इंजेक्शन लगाने के नाम पर भी पैसों की मांग हुई। पैसा न देने के कारण इजेक्शन लगाने में देरी हो गई।
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आयोग ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेजे नोटिस में कहा है कि इस कारण उसके बच्चे की मौत हो गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने कहा, यह घटना गरीब मरीजों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। सरकारी अस्पताल गरीब मरीजों से बिल्कुल सामान्य मरीजों जैसा व्यवहार करते हैं। जबकि गरीब मरीज निजी अस्पतालों के खर्च वहन नहीं कर सकते। इसीलिए वे सरकारी अस्पतालों में आते हैं।
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समय पर इलाज हो जाता तो मासूम की जान बच सकती थी। वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को तत्काल बहराइच के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ओपी पांडेय को हटाने के निर्देश दिए हैं।