नियति इतनी क्रूर कैसे हो सकती है। चार साल पहले राजोरी के ढांगरी गांव की रहने वाली सूरज देवी ने पति को बीमारी के हाथों खोया था। पिछले रविवार बड़े बेटे दीपक को खोया था। सूरज देवी ने इस रविवार दीपक की अस्थियां हरिद्वार भेजीं ही थीं कि घर पर छोटे बेटे प्रिंस का शव पहुंच गया। सदमे में सूरज देवी बेहोश हो गई और इस घड़ी की गवाह बनने वाली हर आंख से अश्रुधारा फूट पड़ी।
ढांगरी आतंकी हमला: बड़े की अस्थियां हरिद्वार भेजते ही घर पहुंचा छोटे का शव, सूरज देवी ने खो दिए दोनों बेटे
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एक जनवरी की शाम को ढांगरी में आतंकियों की फायरिंग में सूरज देवी के बड़े बेटे दीपक की मौत हो गई थी। दीपक की दो दिन बाद ही सेना के ऑर्डिनेंस विभाग में ज्वाइनिंग थी। इसी फायरिंग में छोटा बेटा प्रिंस गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसने रविवार तड़के दम तोड़ दिया। आतंकी हमले ने सूरज देवी की दुनिया ही उजाड़ दी है। दीपक की मौत के बाद रविवार को छोटे बेटे प्रिंस का शव देखकर सूरज देवी बेसुध हो गईं। लोग उन्हें सहारा देने का प्रयास कर रहे थे।
होश आता तो वह बदहवास होकर फिर बेहोश हो जातीं। होश आने पर सिर्फ यही कह रही थीं - मेरे बच्चों का क्या कसूर था। उनका ब्याह देखना चाहती थी। उनकी अर्थी उठ रही है। कोई मेरे बच्चों को वापस कर दो या मुझे भी उनके पास भेज दो। दोनों के परिजनों और गांव के अन्य लोगों की जुबान में यही बात थी कि दोनों बेटों के बाद अब अकेली मां का कौन सहारा बनेगा। सूरज देवी हर रोज दोनों बच्चों के घर आने की राह देखा करती थी। आज वो एक बेटे की अस्थियां हरिद्वार भेज कर दूसरे बेटे का शव घर आते देख रही थी।
ऐसी स्थिति में उस मां पर क्या बीत रही होगी। शाम साढ़े 4 बजे प्रिंस के शव को लेकर अंतिम यात्रा के लिए लोग निकले तो हर तरफ चीख पुकार और आतंकवाद व पाकिस्तान के लिए बद्दुआ निकल रही थीं। दीपक और प्रिंस के एक परिजन अशोक ने बताया कि सरकार चाहे दोनों बेटे की मृत्यु पर मां को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता करेगी, लेकिन क्या सरकार कोई ऐसा सहारा ढूंढ पाएगी जो बुढ़ापे में उस मां का ध्यान रखे। उसकी देखभाल करे और उसके बुढ़ापे का सहारा बने। परिजन के इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था।