कश्मीर के शोपियां में मुठभेड़ में मारे गए आतंकी के पास एम-4 कार्बाइन बरामद हुई है। इससे पहले भी मुठभेड़ में मारे गए कई आतंकियों के कब्जे से एम-4 कार्बाइन राइफल मिल चुकी है। इसे पाकिस्तान से आतंकियों के लिए भेजा जाता है। इसका कारण ये है कि आतंकियों को इस हथियार को चलाने की अच्छी ट्रेनिंग हासिल होती है। ये उनका पसंदीदा हथियार है।
फिर मिली आतंकियों के पास घातक एम-4 राइफल, जानिए इसमें ऐसा क्या है खास?
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बीते साल कुलगाम में हुई मुठभेड़ में मारे गए इमरान भाई नामक पाकिस्तानी जैश के आतंकी से दो हथियार बरामद हुए थे जिनमें से एक एम-4 राइफल थी। इससे आतंकी ज्यादा दूरी से वार कर सकते हैं, क्योंकि इसके ऊपर साइट लगी रहती है।
अभी तक सुरक्षाबलों ने जितने भी हथियार बरामद किए हैं, इनमें ज्यादातर संख्या एम-4 राइफल की है। जितने आतंकी अभी जिंदा हैं उनके पास उतने ही हथियार हैं। पाकिस्तान की कोशिश है कि आईबी या एलओसी के रास्ते जैश और लश्कर के और आतंकी कश्मीर में भेजे जाएं।
- एम-4 का वजन काफी कम होता है।
- इसकी बड़ी खासियत है कस्टमाइज़ेशन। इसमें कई सारी चीजें जोड़ी जा सकती हैं।
- दूर तक देखने के लिए स्कोप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इसकी मारक क्षमता करीब 600 मीटर होती है।
- साथ ही यह 950 गोलियां लगातार दाग सकती हैं।
बता दें कि दक्षिणी कश्मीर के शोपियां में शनिवार रात शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया है। मारे गए आतंकी के पास से बेहद खतरनाक एम-4 कार्बाइन, तीन मैग्जीन, 36 कारतूस, 9600 रुपये और कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। फिलहाल ऑपरेशन जारी है। अभी मारे गए आतंकी की पहचान नहीं हो पाई है। इससे पहले सूचना मिली थी कि सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर विलायत उर्फ सज्जाद अफगानी को घेर लिया है।