Leh-Ladakh: लद्दाख की 'संजीवनी' बनेगी किसानों की कमाई का सहारा, नुब्रा में रिसर्च सेंटर की तैयारी
लद्दाख की नुब्रा घाटी में सी-बकथॉर्न के लिए राष्ट्रीय संजीवनी अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
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केंद्र सरकार ने लद्दाख की नुब्रा घाटी में सी-बकथॉर्न के लिए समर्पित राष्ट्रीय संजीवनी अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। कृषि मंत्रालय की ओर से गठित इस समिति को प्रस्ताव की व्यवहार्यता का आकलन कर आगे की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सी-बकथॉर्न हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पौधा है। कृषि, खाद्य पदार्थों, न्यूट्रास्यूटिकल्स और प्रसंस्करण के क्षेत्र में इसकी अच्छी संभावनाएं हैं। इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री के संजीवनी उल्लेख के बाद बढ़ी चर्चा
सी-बकथॉर्न को राष्ट्रीय स्तर पर तब विशेष पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इसके औषधीय और पोषण संबंधी गुणों का उल्लेख करते हुए इसे संजीवनी कहा था। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 14 अगस्त को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर नुब्रा घाटी में इस शोध केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव रखा था।
नुब्रा घाटी को बनाया जाएगा शोध और व्यावसायीकरण का केंद्र
नुब्रा घाटी लद्दाख में सी-बकथॉर्न का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। प्रस्तावित केंद्र का उद्देश्य इस फसल पर वैज्ञानिक शोध, विकास, मूल्यवर्धन और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 21 अगस्त को प्रस्ताव की समीक्षा के लिए समिति गठित की। समिति की अध्यक्षता आईसीएआर के हॉर्टिकल्चर साइंस डिवीजन के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. वी.बी. पटेल कर रहे हैं। समिति ने 24 अगस्त को लद्दाख का पहला क्षेत्रीय दौरा किया और अधिकारियों तथा संबंधित पक्षों के साथ बैठक की।
शोध से लेकर किसानों की मार्केटिंग तक होगी समीक्षा
समिति सी-बकथॉर्न के आनुवंशिक संसाधनों, प्राकृतिक वितरण, खेती, उत्पादन, उपयोग और लद्दाख में चल रहे शोध कार्यों का आकलन करेगी। साथ ही राष्ट्रीय स्तर के स्वतंत्र शोध केंद्र मौजूदा आईसीएआर संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र या विभिन्न संस्थानों के संयुक्त नेटवर्क जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।
समिति किसानों के क्लस्टर, नर्सरी, सहकारी समितियों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए सी-बकथॉर्न के उत्पादन, प्रसंस्करण और मार्केटिंग की संभावनाओं का भी अध्ययन करेगी।
45 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट
समिति को प्रस्तावित केंद्र के लिए पूंजीगत और नियमित खर्च, मानव संसाधन तथा उपकरणों की जरूरत का अनुमान तैयार करने के साथ पांच साल की कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। इसमें तय लक्ष्य, समयसीमा और निगरानी के मानक भी शामिल होंगे। समिति को गठन के 45 दिनों के भीतर विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) सौंपनी होगी।