अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर एहतियात के तौर पर लिया गया सुरक्षा संबंधी फैसला लोगों के लिए मुसीबत बन गया। सोमवार सुबह से ही सड़कों पर कंटीले तार लगाकर रास्तों को बंद कर दिया गया। यही मंजर मंगलवार को भी जारी रहा। प्रशासन की तरफ से घोषणा की गई थी कि सिर्फ धारा 144 लागू की गई है, लेकिन शहर में कर्फ्यू जैसे हालात रहे।
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जम्मू-कश्मीर मे तैनात सुरक्षाकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
मुख्य सड़क से जुड़ने वाली गलियों तक को तार लगाकर बंद कर दिया गया था। इसकी वजह से आवागमन में परेशानी आई। वहीं जांच-पड़ताल करने के बाद वाहन सवारों को आगे बढ़ने दिया जा रहा था। तो वहीं कुछ जगहों पर पुलिसकर्मियों ने राहगीरों से बदसलूकी कर दी।
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जम्मू-कश्मीर मे तैनात सुरक्षाकर्मी
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जम्मू के पुराने शहर में सख्त पहरा रहा। हर गली में कंटीले तार लगाए लगाए गए थे। लोगों को घरों के बाहर तक नहीं निकलने दिया गया। जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन की तरफ से जम्मू शहर में सिर्फ नगर निगम के दायरे में धारा 144 लागू की गई थी, लेकिन पुलिस की तरफ से नगर निगम के दायरे के बाहर भी सभी जगहों पर कंटीले तार लगाकर सड़कों को बंद कर दिया गया। यहां तक कि बाइक से जाने वाले लोगों को भी रोका गया। शहर के सतवारी चौक, बिक्रम चौक, जानीपुर, गुज्जर नगर पुल, शहीदी चौक, खटीका तालाब आदि इलाकों में भी कंटीली तार लगाकर लोगों को आने जाने से रोक दिया गया।
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जम्मू-कश्मीर मे तैनात सुरक्षाकर्मी
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घरों में नहीं पहुंचे अखबार
सख्ती का आलम यह रहा कि घरों में अखबार तक नहीं पहुंचे। पुलिस कर्मियों ने अखबार ले जाने वाले वाहनों को जम्मू से आगे नहीं जाने दिया। हॉकरों का कहना था कि उन्हें आसपास के इलाकों में जाने से रोक दिया गया। इसकी वजह से वह अखबार नहीं बांट सके। उनका यह भी कहना था कि जब उन्होंने पुलिस कर्मियों से बात करनी चाही, तो पुलिस ने उनसे बदसलूकी भी की।
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दूसरे दिन भी शहर में सख्ती
'नगर निगम के दायरे में 144 लागू की गई थी। रही बात सख्ती की तो पहला दिन था। इसलिए एहतियात के तौर पर जहां कुछ होने की आशंका थी, वहां सख्ती करनी पड़ी। मंगलवार को भी सख्ती रही। आगे के हालत पर बैठक होगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि धारा 144 कब तक रहेगी।'-सुषमा चौहान, उपायुक्त, जम्मू