पाकिस्तान की शह पर पलने वाले आतंकी संगठन फंडिंग से जूझ रहे हैं। इन संगठनों को न तो कश्मीर में अलगावादियों से फंडिंग हो रही है, न ही विदेश में सक्रिय मददगारों से इन्हें मदद मिल रही है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर सक्रिय आतंकी अपने लिए फंड नहीं जुटा पा रहे हैं। लिहाजा पाकिस्तान नारको टेरेरिज्म से इन संगठनों को फंडिंग करा रहा है।
आतंक की परवरिश में जुटा पाकिस्तान: तीन साल में सीमा पार से भेजी गई पांच हजार करोड़ रुपये की हेरोइन
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20 जून 2019 को सुचेतगढ़ सेक्टर में पांच किलो हेरोइन बरामद की गई, सितंबर 2020 को सात किलो हेरोइन राजोरी एलओसी के पास मिली, 3 नवंबर 2020 को पुंछ के मेंढर में चार किलो हेरोइन मिली, 19 जून 2021 में बारामुला में एलओसी के पास 5 किलो हेेरोइन मिली। यही नहीं, एनसीबी ने 2018 में बड़गाम में 60 किलो हेेरोइन बरामद की। अभी हाल ही में बीएसएफ ने कठुआ में 27 किलो हेरोइन बरामद की। ये सारी हेरोइन एलओसी या फिर बॉर्डर पार से आई है। ऐसे बहुत से मामले हैं।
हेरोइन एक महंगा नशा है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रति किलो पांच करोड़ रुपये कीमत है। एक-दो ग्राम की डोज को भी नशा तस्कर 3 से 4 हजार रुपये में बेचते हैं। यही कारण है कि इसकी तस्करी की जाती है। अफगानिस्तान में हेरोइन तैैयार होकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के साथ लगते बॉर्डर और एलओसी पर पहुंचती है। दोनों तरफ सक्रिय तस्करों के जरिए पाकिस्तान इसकी तस्करी कराता है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि पाकिस्तान नारको टेरेरिज्म का सहारा ले रहा है। पाकिस्तान की निरंतर कोशिश है कि हेेरोइन को भेजकर फंड जुटाया जाए। कठुआ में पकड़ी गई हेरोइन के नारको टेरेरिज्म के एंगल से मना नहीं कर सकते हैं। यह भी इसका एक हिस्सा हो सकता है। -एसपीएस संधु, डीआईजी, प्रवक्ता बीएसएफ
हमेशा से पाकिस्तान बॉर्डर पार से नशा तस्करी कराता रहा है। कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि इससे फंड जुटाकर पाकिस्तान आतंकी संगठनों की गतिविधियां चलाता है। -आरसी कोतवाल, एसएसपी, कठुआ