कश्मीरी चेरी पक कर तैयार हो गई है। तुड़ान का काम तेज गति से चल रहा है। मई के अंत तक बाजारों में लोग ताजा चेेरी का आनंद उठा सकेंगे। बागवानी विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार इस बार जम्मू-कश्मीर में 12 हजार मीट्रिक टन चेरी की पैदावार हुई है।
कश्मीरी चेरी की बंपर पैदावार: कोरोना संक्रमण के दौरान बढ़ी मांग, जानिए इसमें क्या है खास
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बागवानी विभाग ने बताया कि दो हजार मीट्रिक टन चेरी विदेश भेजी जाएगी। दस मीट्रिक टन चेरी प्रदेश की मंडियों में उपलब्ध करवाई जाएगी। इसमें से आठ मीट्रिक टन देश के विभिन्न राज्यों में भेजी जाएगी। इस बार चेरी की बंपर पैदावार हुई है। इससे बागवानों की आर्थिक स्थिति काफी सुदृढ़ होगी।
विभाग ने बताया कि जम्मू संभाग में चार कनाल जमीन पर चेरी की पैदावार हुई है। संभाग में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास तेज किए गए हैं। चेरी की फसल अप्रैल में पक जाती है। जुलाई और अगस्त माह में सेब की फसल तैयार होती है। इस बीच कोई भी फल तैयार नहीं होता है। इस कारण बागवानों को अच्छी आय हो जाती है। स्थानीय चेरी की डिमांड मंडियों में ज्यादा रहती है। प्रदेशभर की मंडियों ने पहले ही चेरी खरीद के लिए ऑनलाइन कार्रवाई पूरी कर ली है।
चेरी में भरपूर मात्रा में विटामिन
चेरी में विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होती है। बीते साल चेरी बाजारों में जुलाई माह में उपलब्ध नहीं हो पाई थी। पहले ही बिक गई थी। कारोना संक्रमण के दौरान चेरी की प्रदेश में डिमांड बढ़ी है।
बाजारों में चेरी 60 रुपये किलो में मिल सकती है। कुछ बागवान मांग ज्यादा रहने पर लाखों रुपये कमाई करते हैं। इस बार मौसम अनुकूल रहा है, पैदावार ज्यादा होने पर आय में बढ़ोतरी होगी। लोग कम दामों में चेरी खरीद सकेंगे।
कश्मीरी चेरी पक कर तैयार हो गई है। जम्मू संभाग में भी चेरी का तुड़ान शुरू किया गया है। स्थानीय मंडियों के माध्यम से चेरी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इसी माह के अंत तक चेरी बाजारों में आ जाएगी। -राम सेवक, निदेशक, बागवानी विभाग