नेशनल कांफ्रेंस(नेकां) अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला उन नेताओं में शुमार हैं, जिनको जम्मू-कश्मीर में सभी वर्ग के लोगों का समर्थन मिलता है। अब्दुल्ला अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते हैं। विरोध हो या समर्थन, वो खुलकर करते हैं। बुधवार को उन्होंने कहा कि हम सभी को बिना डरे आतंकी ताकतों का मुकाबला करना होगा। इनके नापाक मंसूबों को नाकाम करना है। हम भारत का हिस्सा हैं और इसके लिए हम गोली खाने को भी तैयार हैं। वह आतंकी हमले में मारी गईं प्रिंसिपल सुपिंदर कौर के भोग(दसवां) संस्कार में शामिल होने के लिए गुरुद्वारा शहीद बुंगा साहिब पहुंचे थे।
नेकां अध्यक्ष ने कहा कि पूरे हिंदुस्तान में मुसलमानों, सिखों और हिंदुओं को बांटा जा रहा है। इसे बंद करना होगा। इसको अगर बंद नहीं किया गया तो हिंदुस्तान नहीं रहेगा और अगर हिंदुस्तान को बचाना है तो हमें मिल-जुलकर रहना होगा। डॉ. फारूक ने देवेंद्र राणा के पार्टी छोड़ने पर कहा कि पार्टी के लोग आते हैं और चले जाते हैं, इसमें कोई नई बात नहीं है।
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नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला
जब सब भाग गए थे तब भी सिख यहीं थे
गुरुद्वारा साहिब में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. फारूक भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह सरासर इंसानियत का कत्ल हुआ है। हमें इन दरिंदों का डटकर मुकाबला करना है। जब कश्मीर से सभी भाग गए तब एक ही कौम आगे आई और वह है सिख कौम, जिसने कश्मीर नहीं छोड़ा। इस बात का उन्हें फख्र है। डॉ. फारूक ने कहा कि प्रिंसिपल सुपिंदर हमारे बच्चों को पढ़ाती थीं, उन्हें कोई मारे और समझे हम इस्लाम की खिदमत कर रहे हैं तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। कातिल जहन्नुम में जाएंगे।
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नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला
अब बात करते हैं उस वाकये की जब अब्दुल्ला को देशप्रेम के लिए घाटी में काफी विरोध झेलना पड़ा था। घटना बीते साल 20 अगस्त की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में दिल्ली में एक समारोह आयोजित किया गया था। इसमें फारूक ने 'भारत माता की जय' और जय हिंद के नारे लगाए लेकिन ऐसा करने से कुछ लोग नाराज हो गए। फारूक अब्दुल्ला को अपने लगाए गए नारे पर विरोध झेलना पड़ा था। 'भारत माता की जय' कहने पर फारूक को उनके ही प्रदेश में लोगों ने जूते दिखाए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। फारूक अब्दुल्ला ने इस मामले पर चुप्पी नहीं साधी, उन्होंने विरोध करने वालों को करारा जवाब दिया था।
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नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला
विरोध के बाद नौबत यह आ गई कि फारूक को एसएसजी एस्कार्ट की सुरक्षा देनी पड़ी। ईद के मौके पर उन्हें हजरतबल मस्जिद में कुछ युवाओं ने फिर धमकी दी, यहां तक कि उन्हें ईदगाह परिसर से भी बाहर करने की मांग की गई। फारूक ने इस मामले को चंद सिरफिरों की करतूत बताया था।
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परिजनों के साथ नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : बासित जरगर
उन्होंने कहा था कि सियासी लोगों का विरोध लोकतंत्र में होता है, लेकिन विरोध के लिए गलत दिन का चुनाव किया गया। ईद पर लोग नमाज पढ़ने गए थे। विरोध तो बाद में भी हो सकता था। उन्हें क्या लगता है कि इससे फारूक डर जाएगा। फारूक कभी भी इससे डरने वाला नहीं है।