नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम पर सहमति बनने के बाद एक सप्ताह से अधिक समय से शांति बनी है। इससेे जहां आम लोग राहत की सांस ले रहे हैं और जनजीवन सामान्य हो रहा है। वहीं हर दिन पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित रहने वाले करमाड़ा सेक्टर में पुंछ रावलाकोट सड़क किनारे स्थित अंतिम सरकारी माडल स्कूल फकीरदारा के विद्यार्थियों को सबसे अधिक लाभ प्राप्त हुआ है। विद्यार्थियों को अब चमचमाते कमरों में रंग बिरंगे एवं सुंदर फर्नीचर पर बैठकर पढ़ाई करने का मौका मिल रहा है। बच्चों में खुशी का माहौल है।
धमाकों के खौफ से यहां पसर जाता था सन्नाटा, संघर्षविराम पर सहमति के बाद बदल रही है तस्वीर
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बच्चों का कहना है कि जहां पहले यह स्कूल अक्सर पाकिस्तानी गोलों से क्षतिग्रस्त हो जाता था। फर्नीचर भी तबाह हो जाता था, जिसके कारण हमें पढ़ाई करने में परेशानी होती थी। गोलाबारी के कारण हम भी कभी कभार ही स्कूल आ पाते थे, लेकिन अब कई दिन से नियंत्रण रेखा पर शांति होने के कारण हम काफी खुश हैं। स्कूल प्रशासन ने हमारे पूरे स्कूल की मरम्मत कराने के साथ रंगरोगन करा कर स्कूल को नया बना दिया है। उसके साथ ही शिक्षा विभाग की तरफ से स्कूल के लिए नया फर्नीचर भी दिया है। जिस पर बैठकर हम बेखौफ पढ़ाई कर रहे हैं।
शिक्षक मनदीप कौर ने कहा कि हमारे इस स्कूल पर अक्सर पाकिस्तानी गोले आ कर लगते थे। इसमें कई बार स्कूल क्षतिग्रस्त हुआ है। गोलाबारी के चलते बच्चे भी स्कूल नहीं आ पाते थे। जो आते थे उनका ध्यान भी पढ़ाई में नहीं लग पाता था। बच्चे डरे सहमे से रहते थे और जब कभी स्कूल के समय में गोलाबारी शुरू हो जाती थी तो जान बचाने के बजाए बच्चों की जान बचाने की चिंता सताने लगती थी।
कहा कि एक बार तो पाकिस्तानी सेना की तरफ से दागे गए तीन मोर्टार स्कूल पर आकर लगे थे, जिसमें छत को भेदते हुए एक मोर्टार ने अंदर रखे फर्नीचर को तबाह कर दिया था। दूसरे मोर्टार से स्कूल की दीवारें और छत बुरी तरह तबाह हो गई थी। काफी समय तक स्कूल की तरफ देखकर भी डर लगता था। ऊपर वाले का शुक्र था कि जिस समय गोले स्कूल में गिरे थे उस समय स्कूल बंद था।
सरपंच मोहम्मद शरीफ ने कहा कि यह स्कूल पहले प्राइमरी स्कूल फकीरदरा होता था। जो नाले के किनारे था। वह टीन की चादर से बना था। जब भारत और पाकिस्तान के बीच पुंछ रावलाकोट राहे मिलन बस सेवा शुरू की जानी थी तो उससे पहले इस स्कूल को पुंछ रावलाकोट सड़क के किनारे पक्का एवं आधुनिक बनाने के साथ बड़ा कर मिडल स्कूल बना दिया गया। इससे हमें काफी खुशी हुई कि हमारे बच्चों को आधुनिक स्कूल में पढ़ने का मौका मिलेगा, लेकिन कुछ ही वर्षों के बाद नियंत्रण रेखा पर होने वाली गोलाबारी ने हमारी खुशी को मिटा दिया। गोलाबारी में अकसर यहां गोले गिरने लगे थे। चलो खुदा का शुक्र है कि अब नियंत्रण रेखा पर शांति है।