जम्मू-कश्मीर में इन दिनों सियासी पारा हाई है। गुलाम नबी आजाद के विरोध और समर्थन में हुए प्रदर्शनों से सियासी भूचाल आ गया है। यह पहली बार हुआ है जब आजाद के खिलाफ खुलकर जम्मू में नारे लगे हैं। इससे पार्टी में सियासी हलचल बढ़ी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों पर मंथन कर रहे हैं। इसमें कोई भी आजाद के खिलाफ नहीं बोल रहा है। हालांकि, गत दिनों जी-23 के नेताओं के बोल पार्टी कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरे हैं। जम्मू में पार्टी को बिना जानकारी आजाद के विरोध और समर्थन में प्रदर्शन हुए। इसे विरोध पक्ष में पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध को भी माना जा रहा है।
कांग्रेस में भूचालः आजाद के खिलाफ जम्मू में ऐसा पहली बार हुआ, शर्मा ने कही ये बात
जम्मू-कश्मीर राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद जम्मू में गुलाम नबी आजाद द्वारा सार्वजनिक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने से कार्यकर्ताओं का एक धड़ा खफा है। उनका कहना है कि इससे प्रदेश कांग्रेस की छवि खराब करने की कोशिश की गई है।
नए घटनाक्रम से पार्टी की बगावत और अंतर्कलह खुलकर सामने आई है। इससे विरोध और समर्थन धड़ों में टकराव बढ़ सकता है। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी हाईकमान क्या कार्रवाई करता है, इसे देखना बाकी है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रवींद्र शर्मा ने कहा कि गुलाम नबी आजाद बड़े कद वाले नेता हैं। उनके खिलाफ हुए प्रदर्शन की पार्टी को कोई जानकारी नहीं थी और ना ही इसके लिए कोई मंजूरी दी गई। उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में की बातों से कुछ भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। हालांकि जम्मू में सार्वजनिक और पार्टी कार्यालय में उन्होंने भाजपा के खिलाफ खुलकर हमला बोला था।
शर्मा ने कहा कि भाजपा में जाने के कयासों पर भी आजाद ने विराम लगाया था। जी-23 के कुछ नेताओं के बोल पर पार्टी कार्यकर्ताओं में कुछ रोष है। आजाद के खिलाफ प्रदर्शन की घटना पर मंथन किया जाएगा। हम पार्टी के वरिष्ठ नेता के खिलाफ ऐसी कार्रवाई का कोई समर्थन नहीं करते हैं।
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