केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने हालांकि आंदोलन बारे कोई निर्णायक फैसला अभी नहीं लिया है लेकिन टीकरी बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों ने घर वापस जाने की तैयारी शुरू कर दी है। आंदोलनकारी किसानों के साथ गुफ्तगू से लगता है कि अब वे सिंघू बार्डर पर बुधवार को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की आपात बैठक में इस संबंध में होने वाले फैसले के इंतजार में हैं। टीकरी बॉर्डर पड़ाव में ठहरे पंजाब के किसानों का मन अब घर जाने को उत्सुक है। वे अपने ट्रैक्टरों को तैयार कर रहे हैं। मंगलवार को कई किसान अपने टेंटों के पास ट्रैक्टरों की सफाई और धुलाई करते देखे गए। नयागांव चौक के पास और टीकरी बार्डर के निकट अस्थायी दुकानों पर किसानों की भीड़ लगी रही। स्थानीय फुटवियर कंपनियों के फैक्टरी आउटलेट में भी किसानों ने जमकर खरीदारी की।
2 of 5
फाजिल्का के किसानों ने डॉक्टर मलिक के साथ लिया फोटो।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आंदोलन के दौरान मददगार स्थानीय लोगों के साथ किसान सेल्फी भी ले रहे हैं। बहादुरगढ़ के डॉ. एसके मलिक ने आंदोलन के दौरान नयागांव चौक के पास किसानों के टेंट में कैंप क्लीनिक चलाकर किसानों की महीनों तक सेवा की। फिरोजपुर फाजिल्का के इन किसानों ने मंगलवार को डॉ. मलिक के साथ मुलाकात की और पंजाब-हरियाणा भाईचारे की मिसाल बताते हुए उनका आभार जताया। उन्होंने मलिक के साथ सेल्फी भी ली। किसानों बख्शीश सिंह, सुखजीत सिंह अमरीक सिंह ने कहा कि हरियाणा निवासियों के प्रेम को वे भुला नहीं पाएंगे।
3 of 5
नयागांव के पास जैकेट खरीदते बुजुर्ग किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर के किसान हरजिंदर सिंह ने कहा कि जब से हम यहां आए हैं, मेरा ट्रैक्टर यहीं खड़ा है। बीच में कभी कभार हम अपने लोगों को लेने के लिए बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन, सब्जी आदि खरीदने बाजार या टीकरी बार्डर सभा में जाते थे। अधिकतर समय ट्रैक्टर यहीं खड़ा रहा। अब केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया है और हमारी अन्य मांगों को भी स्वीकार करने की संभावना है, इसलिए मैंने अपने ट्रैक्टर को संभाल लिया है, बैटरी भी बदल ली। ताकि निर्णय लेने पर आगे बढ़ सकें। आंदोलन आगे चला तो ट्रैक्टर यहीं दिल्ली में ही काम आएगा।
4 of 5
टीकरी बॉर्डर पर किसान नेताओं के विचार सुनते किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक फैक्टरी आउटलेट से जूते खरीद रहे बलकार सिंह ने कहा कि उनके परिवार में सात आदमी हैं। दिल्ली मोर्चा की याद के तौर पर सभी के लिए ब्रांडेड जूते ले जा रहा हूं। संगरूर के गुरप्रीत सिंह ने कहा कि जब से पीएम मोदी ने तीन कानूनों को रद्द करने की घोषणा की है, तभी से हम खुश हैं, त्यौहार सा आनंद है। बहादुरगढ़ में आंदोलन की यादें अपने साथ ले जाने के लिए खरीदारी कर रहे है। उन्होंने कहा, अब हम सब वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। बस एसकेएम के फैसले का इंतजार है।
5 of 5
सर्व किसान मंच की सभा में एकता का प्रदर्शन करतीं महिला किसान नेेता।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किसान आंदोलन खत्म होने के संबंध में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले से पहले कोई भी किसान टीकरी बार्डर से नहीं हटेगा। इसलिए सभी की निगाहें अब एसकेएम की बुधवार की बैठक पर हैं। -परगट सिंह, बीकेयू (राजेवाल)