पद्म विभूषण से सम्मानित शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का सोमवार को अमेरिका में 90 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से स्थानीय संगीत प्रेमियों में शोक की लहर है।
स्मृति शेष: यहां पंडित जसराज की रामधुन में खो गए थे श्रोता, वो दिन आज भी याद करते हैं लोग
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पंडित जसराज के कदम नब्बे के दशक में एक बार गोरखपुर में पड़े थे। वह दूरदर्शन एवं आकाशवाणी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विशेष कलाकार के रूप में प्रस्तुति देने आए थे। उस दौरान उनके गायन में श्रोता इस कदर डूब गए थे कि उन्हें समय का पता ही नहीं चला था। उस समय उनके साथ प्रस्तुति देने वाले स्थानीय वरिष्ठ कलाकारों ने अपनी यादें साझा की हैं।
सर्वेश दुबे की मंच से की प्रशंसा
आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक सर्वेश दुबे ने बताया कि जिस कार्यक्रम में शामिल होने पंडित जसराज आए थे उसका संचालन मैंने ही किया था। जब पंडित जी ने अलाप लिया था तो हर किसी ने अपने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। लोगों ने कभी ऐसी लाइव प्रस्तुति नहीं देखी थी। तीन घंटे का कार्यक्रम कब शुरू हुआ और कब खत्म हुआ लोगों को पता ही नहीं चला। उन्होंने मंच से मेरी प्रशंसा करते हुए आशीर्वाद दिया था और कहा कि तुम्हारे गले में मां सरस्वती बसती हैं। उनके स्पर्श मात्र से मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे, उस समय ऐसा लगा मानो खुद भगवान मुझे आशीर्वाद दे रहे हैं।
डॉ. शरदमणि ने तानपुरे पर दिया था साथ
वरिष्ठ कलाकार डॉ. शरदमणि त्रिपाठी ने बताया कि पंडित जसराज ने मुख्य प्रस्तुति के रूप में राग बिहाग गाया था। इसके बाद हवेली संगीत गाया था। उनकी गायकी का कोई जवाब नहीं था। उनके साथ उनकी शिष्या श्वेता झावेरी भी आई थीं। उन्होंने भी गायन किया था। इस दौरान मैंने तानपुरे पर संगत दी थी। पंडित जसराज ने जसरंगी पद्धति को शुरू किया था, जिसमें मोचना पद्धति से दो रागों को एक साथ मिलाकर गाया जाता था। वह कार्यक्रम आकाशवाणी के बड़े कार्यक्रमों में से एक था। उसकी यादें हम सभी के जहन में हमेशा ताजा रहेंगी।
वह यादगार कार्यक्रम था
शास्त्रीय व सुगम संगीत की वरिष्ठ कलाकार मिथलेश तिवारी ने बताया कि आकाशवाणी के कार्यक्रमों में पंडित जसराज का कार्यक्रम सबसे यादगार था। गोरखपुर आकाशवाणी के इतिहास में वह पहला ऐसा कार्यक्रम था जो अभी भी लोगों के जहन में ताजा है। उन्होंने उस दिन प्रमाणित किया कि भारतीय संगीत में कैसा तेज है। लोगों ने अपनी आंखों से देखा और जाना कि भारतीय संगीत की जड़ें कितनी मजबूत हैं। कार्यक्रम के दौरान पंडित जी की रामधुन में श्रोता खो गए थे। भक्ति के सागर में गोते लगाने लगे थे। इस दौरान हम लोगों ने भी एक प्रस्तुति दी, जिसकी उन्होंने खूब प्रशंसा की। उस दिन को भुलाया नहीं जा सकता।