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गोरखनाथ से जुड़ी यह बात नहीं जानते होंगे आप, इस चीज से बनता है मंदिर का प्रसाद

Mon, 29 Jun 2020 08:40 AM IST
vivek shukla टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 29 Jun 2020 08:40 AM IST
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Special story Gorakhnath temple Guru Gorakhnath gorakhpur
बाबा गोरखनाथ की आरती करते सीएम योगी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

गुरु गोरखनाथ द्वारा जलाई गई धूनी गोरखनाथ मंदिर में आज भी जलती है। उसमें मंदिर के पुजारी लकड़ी और गाय का कंडा डालते हैं। उस धूनी की भभूत ही गोरखनाथ मंदिर का प्रमुख प्रसाद है। उसकी भभूत मंदिर में आए हर भक्तों को दी जाती है।

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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।

मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने गोरखनाथ मंदिर में जलने वाले अखंड धूनी का के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गुरु गोरखनाथ हिमाचल स्थित कांगड़ा में ज्चाला देवी के दरबार पहुंचे तो देवी ने उन्हें अपने वहां भोजन के लिए आमंत्रित किया। तब गुरु गोरखनाथ ने कहा कि देवी मैं योगी हूं। भिक्षाटन करके जो लेकर आता हूं, उसे ही बनाकर खाता हूं।

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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

उन्होंने आगे कहा कि यहां पर बलि दी जाती है। यहां पर वह भोजन नहीं कर सकता हूं। आप पानी गरम कीजिए मैं खिचड़ी मांग कर लाता हूं। यह कह कर गुरु गोरखनाथ वहां से निकले और चलते हुए यहां आ गए, यहां पर उस समय चारों तरफ जंगल था। गुरु गोरखनाथ ने यहां पर धूनी रमा दी।

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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

योगी के बारे में कहा जाता है कि योगी किसी के घर भोजन नहीं करते हैं न ही किसी के घर रुकते हैं। उनके पास त्रिशूल, चमचा, झोला, खप्पर उनके साथ रहता है। जहां पर रुकते हैं अपनी धूनी रमाते हैं।

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gorakhnath temple - फोटो : आनंद चौधरी।

तिवारी के मुताबिक यहां पर चारो तरफ जंगल था। इस नाते गुरु गोरखनाथ यहां पर रुके थे। वह कहते हैं कि इसके अगल-बगल के पचास से अधिक गांव ऐसे हैं जिनका नाम आज भी जंगल से जुड़ा है। जैसे जंगल कौड़िया, जंगल तिकोनियां, जंगल सालिगराम जैसे अनेक ऐसे गांव हैं। गुरु गोरखनाथ द्वारा जलाया गया धूनी आज भी उसी तरह से अनवरत जल रहा है। उसे जलाने के लिए वन विभाग की तरफ से लकड़ी दी जाती है।

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